Nagpur News: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समिति के पुनर्गठन पर उठा विवाद, नई समिति बनाने की मांग

Dr. Ambedkar Prakashan Samiti reconstitution controversy: महाराष्ट्र में आंबेडकर समिति के पुनर्गठन के बाद विवाद बढ़ गया है। डॉ. यशवंत मनोहर ने नई समिति में विचारधारा को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे भंग करने की मांग की है। उन्होंने आंबेडकर के विचारों को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए नई समिति बनाने का सुझाव दिया है।
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समिति के पुनर्गठन पर बढ़ता विवाद
नागपुर। महाराष्ट्र सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चरित्र और साधन प्रकाशन समिति’ के पुनर्गठन के बाद राज्य में वैचारिक विवाद गहरा गया है। वरिष्ठ साहित्यकार और आंबेडकरी चिंतक डॉ. यशवंत मनोहर ने इस नई समिति पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे तत्काल भंग करने की मांग की है।
बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती — 14 अप्रैल 2026 — के अवसर पर यह मुद्दा सामने आना राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. मनोहर ने आरोप लगाया कि नई समिति में समरसता विचारधारा से जुड़े लोगों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है। उन्होंने कहा, “जिस समिति पर बाबासाहेब के जीवन और विचारों के प्रकाशन की जिम्मेदारी है, उसमें ऐसे सदस्य होने चाहिए जो उनके सिद्धांतों को समझते और समर्थन करते हों — न कि केवल सरकारी नीतियों के प्रति वफादार हों।” उन्होंने यह भी आशंका जताई कि वर्तमान समिति के माध्यम से एक विशेष एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है।
नई समिति को लेकर उठ रही असहमति
डॉ. मनोहर ने नई समिति के लिए वैकल्पिक नाम भी सुझाए हैं — जिनमें ज. वि. पवार, अर्जुन डांगले, जयदेव गायकवाड़, उमेश बगाड़े और उत्तम कांबले शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने गोपाल गुरु और सुहास पलशीकर जैसे विद्वानों को समिति का सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा है।
डॉ. मनोहर और अन्य कार्यकर्ताओं की मांग है कि समिति में केवल आंबेडकरवादी दृष्टिकोण रखने वाले वास्तविक शोधकर्ताओं को स्थान दिया जाए, ताकि बाबासाहेब के विचार सही स्वरूप में जनता तक पहुंच सकें। जयंती के दिन यह विवाद उठने के बाद अब सभी की नजरें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

