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नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार

नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार
नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार

नागपुर में आयोजित महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी महिलाओं के लिए बड़ा अवसर बनकर उभरी है। यहां स्वयं सहायता समूहों को बाजार और पहचान मिल रही है। सरकार उमेद मॉल और योजनाओं के जरिए उन्हें सशक्त बना रही है। क्या यह पहल महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदल पाएगी, इस पर सबकी नजर है।

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Dipali Kumari
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Mahalaxmi Saras Exhibition: महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी इस बार सिर्फ एक मेले तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का मजबूत मंच बनकर उभरी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं यहां अपने उत्पादों के जरिए न सिर्फ अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी हो रही हैं।

Mahalaxmi Saras Exhibition
नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार

राज्य के 36 जिलों में “उमेद मॉल” की पहल

इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल बिक्री का केंद्र नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के हुनर को एक बड़े ब्रांड के रूप में स्थापित करने का जरिया बन चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य के 36 जिलों में “उमेद मॉल” स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को स्थायी बाजार उपलब्ध हो सकेगा और उनके उत्पादों की पहुंच और बढ़ेगी।

नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार
नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार

प्रदर्शनी में 404 स्टॉल

इस वर्ष प्रदर्शनी में कुल 404 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां अलग-अलग जिलों से आई महिलाएं अपने हस्तशिल्प, खाद्य सामग्री और अन्य उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रही हैं। अब तक इस आयोजन के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये की बिक्री हो चुकी है, जिसे सरकार और आगे बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार
नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार

1 करोड़ महिलाओं को सशक्त बनाने का लक्ष्य

ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने जानकारी दी कि “लखपति दीदी” अभियान के तहत 1 करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके पहले चरण में 13 जिलों में उमेद मॉल बनाए जाएंगे, जिससे ग्रामीण महिलाओं को भी स्थायी बाजार और बेहतर अवसर मिल सकें।

नागपुर में महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी: महिलाओं के सपनों को मिल रहा बाजार
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कार्यक्रम में चन्द्रशेखर बावनकुले और आशीष जयसवाल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।