नागपुर में श्रीगोविंद प्रभु और श्रीचक्रधर स्वामी के समता संदेश पर विशेष व्याख्यान

नागपुर में श्रीगोविंद प्रभु और श्रीचक्रधर स्वामी का विशेष कार्यक्रम: नागपुर के धनवटे नेशनल कॉलेज में श्रीगोविंद प्रभु और श्रीचक्रधर स्वामी के अवतरण दिवस पर विशेष कार्यक्रम हुआ। वक्ताओं ने उनके समता और मानव कल्याण के विचारों पर चर्चा की। रिद्धपुर के साहित्यिक महत्व और महानुभाव साहित्य के योगदान को भी बताया गया। अभिवाचन प्रतियोगिता में 40 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
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श्रीगोविंद प्रभु और श्रीचक्रधर स्वामी के समता विचारों पर चर्चा
नागपुर में श्रीगोविंद प्रभु और श्रीचक्रधर स्वामी का विशेष कार्यक्रम: नागपुर, 25 सितंबर। भगवान सर्वज्ञ श्रीचक्रधर स्वामी और श्रीगोविंद प्रभु के अवतरण दिवस के अवसर पर धनवटे नेशनल कॉलेज में विशेष व्याख्यान एवं अभिवाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के भगवान श्रीचक्रधर स्वामी अध्यासन और धनवटे नेशनल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। उद्घाटन महानुभाव चिंतक एवं अध्येता पुरुषोत्तम ठाकरे ने किया। अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कोठे ने की।
डॉ. प्रशांत कोठे ने कहा कि श्रीगोविंद प्रभु और सर्वज्ञ श्रीचक्रधर स्वामी ने 12वीं शताब्दी में समानता का संदेश देते हुए बहुजन समाज को अपने विचारों से जोड़ा और ब्रह्मविद्या का मार्ग सभी के लिए खोला। इसी कारण उन्हें समता का आद्य प्रवर्तक माना जाता है।
विश्वविद्यालय के भगवान श्रीचक्रधर स्वामी अध्यासन प्रमुख डॉ. भारतभूषण शास्त्री ने बताया कि रिद्धपुर की पहचान श्रीगोविंद प्रभु के कारण है, जिन्होंने वहां लगभग सवा सौ वर्ष निवास किया। मराठी का आद्य चरित्रग्रंथ ‘लीळाचरित्र’ और ‘धवळे’ इसी भूमि पर लिखे गए, इसलिए रिद्धपुर को मराठी साहित्य की जन्मभूमि कहा जा सकता है।

अभिवाचन प्रतियोगिता में 40 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
मराठी भाषा विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अविनाश आवलगावकर ने कहा कि गोविंद प्रभु के जीवन-साहित्य अध्ययन में ‘रिद्धपुर चरित्र’, ‘रिद्धपुर वर्णन’ और ‘राऊळ आख्यान’ जैसे ग्रंथ महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने महानुभाव साहित्य की मराठी भाषा-विकास में भूमिका रेखांकित की।
अभिवाचन प्रतियोगिता में 40 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रद्युम्न देव प्रथम, मोहनी वनकर द्वितीय और समृद्धि मिश्रा तृतीय स्थान पर रहीं, जबकि विसुदा मांग को प्रोत्साहन पुरस्कार मिला। सभी विजेताओं को पुरस्कार व प्रमाणपत्र दिए गए।
प्रस्तावना डॉ. पद्मिनी दूरगकर, संचालन डॉ. स्मिता शहाणे और आभार डॉ. कविता दुर्गे ने माना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और महानुभाव साहित्य के अध्येता उपस्थित रहे।
इस आयोजन से महानुभाव साहित्य और रिद्धपुर की सांस्कृतिक विरासत को लेकर नई पीढ़ी में रुचि बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

