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1 जुलाई से महाराष्ट्र में नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था लागू, 125 दिन काम की गारंटी

1 जुलाई से महाराष्ट्र में नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था लागू, 125 दिन काम की गारंटी
Viksit Bharat G-RAMJI Act replacing MGNREGA Nagpur: 1 जुलाई से महाराष्ट्र में नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था लागू, 125 दिन काम की गारंटी (Photo source:AI)

Viksit Bharat G-RAMJI Act replacing MGNREGA Nagpur: महाराष्ट्र में 1 जुलाई से विकसित भारत जी-रामजी अधिनियम लागू किया जाएगा, जो मनरेगा का स्थान लेगा। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। योजना में जल संरक्षण, ग्रामीण ढांचा निर्माण और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। नागपुर विभाग ने इसके क्रियान्वयन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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Asfi Shadab
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125 दिनों के रोजगार की गारंटी के साथ लागू होगी नई ग्रामीण व्यवस्था

नागपुर, 25 जून। ग्रामीण रोजगार को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र प्रायोजित ‘विकसित भारत जी-रामजी अधिनियम’ महाराष्ट्र में 1 जुलाई से लागू किया जाएगा। यह नया कानून वर्तमान मनरेगा अधिनियम का स्थान लेगा और ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करेगा।

अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ की परिकल्पना के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार और आजीविका के अवसर बढ़ाना है।

प्राथमिकता वाले कार्य

योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण, आजीविका आधारित परियोजनाएं और प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्राम पंचायतें ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार करेंगी, जो पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय भू-स्थानिक तकनीक आधारित प्रणाली के अनुरूप होगी।

कृषि सीजन में खेतों के लिए पर्याप्त मजदूर उपलब्ध रहें, इसके लिए राज्यों को 60 दिनों की अग्रिम अवधि निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है, जिस दौरान योजना के कार्य नहीं कराए जाएंगे।

बेरोजगारी भत्ता और मुआवजे का प्रावधान

अधिनियम में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि निर्धारित समय में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मुआवजा देने का भी प्रावधान रखा गया है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निधि वितरण की व्यवस्था भी तय की गई है।

नागपुर विभाग पूरी तरह तैयार

विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने बताया, “विकसित भारत जी-रामजी अधिनियम के सफल क्रियान्वयन के लिए नागपुर विभाग पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला प्रशासन को योजना की जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।

1 जुलाई से योजना के प्रभावी होते ही नागपुर विभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।