Kolkata News: मोहन भागवत के बयान, परिसीमन विधेयक और झारखंड छात्र आंदोलन पर दिलीप घोष की प्रतिक्रिया

Dilip Ghosh Political Reaction on Mohan Bhagwat, Delimitation Bill and Jharkhand Student Protest: न्यूटाउन में दिलीप घोष ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि छात्र-युवाओं के हर विरोध को देश विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने परिसीमन विधेयक पर सरकार का भरोसा जताया और झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल उठाते हुए सरकार की भूमिका पर भी टिप्पणी की।
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मोहन भागवत के बयान से लेकर झारखंड छात्र आंदोलन तक, कई मुद्दों पर बोले दिलीप घोष
Dilip Ghosh Political Reaction on Mohan Bhagwat, Delimitation Bill and Jharkhand Student Protest: न्यू टाउन में भाजपा नेता दिलीप घोष ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। हमारे संवाददाता इक़बाल से बातचीत में उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी, केंद्र के परिसीमन बिल और झारखंड के छात्र आंदोलन पर खुलकर बात की।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर दिलीप घोष ने कहा कि छात्र-युवा समाज के विरोध को हमेशा राष्ट्रविरोधी नहीं माना जाना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा था, “यदिजेन-ज़ी (Gen-Z) प्रतिबाद करता है, तो वे राष्ट्रविरोधी नहीं हैं। वे हमारे ही लोग हैं, हमारी आगामी पीढ़ी। मेरा विश्वास है कि जेन-ज़ी (Gen-Z) और जेन अल्फा (Gen Alpha) मौजूदा पीढ़ी से अधिक ईमानदार हैं और देशप्रेम व देशसेवा का सच्चा आह्वान उन्हें गहराई से प्रभावित करता है।”
केंद्र सरकार के परिसीमन बिल पर घोष ने कहा कि सरकार इसे पास कराने को लेकर आत्मविश्वासी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की बैठक के बाद कांग्रेस का समर्थन भी मांगा गया है। रिजिजू ने कहा, “हम राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, शत्रु नहीं।” सूत्रों के अनुसार सरकार के पास बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या मौजूद है, फिर भी प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है।

परिसीमन विधेयक और छात्र आंदोलन पर सरकार तथा विपक्ष की भूमिका पर रखी बात
झारखंड में पिछले 14 दिनों से जारी छात्र आंदोलन पर घोष ने कहा कि आंदोलन जारी है, लेकिन ‘ककरोच जनता पार्टी’ की भूमिका बिल्कुल संतोषजनक नहीं रही।
परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर चल रहे इस आंदोलन पर उन्होंने सवाल उठाया, “यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे सकते हैं, तो हेमंत सोरेन क्यों नहीं दे सकते?” उन्होंने बताया कि यह आंदोलन लगातार 13 दिनों से चल रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार उनकी मांगों के प्रति उदासीन है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं।
आगे देखना होगा कि झारखंड सरकार छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और परिसीमन बिल पर कांग्रेस का स्टैंड क्या रहता है।
रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

