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चुनाव से पहले कोलकाता में बसों की भारी कमी, आम लोगों की बढ़ी परेशानी

डीजल महंगा होने से बढ़ी बस मालिकों की चिंता, किराया बढ़ाने की मांग तेज
डीजल महंगा होने से बढ़ी बस मालिकों की चिंता, किराया बढ़ाने की मांग तेज

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले कोलकाता में बसों की कमी से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। प्रशासन ने चुनावी ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में बसों को अधिग्रहित किया है। इससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और शहर की परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले प्रथम चरण के चुनाव से पहले कोलकाता की सड़कों पर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। आम दिनों में जहां बसों और वाहनों की चहल-पहल रहती है, वहीं अब सड़कों पर सन्नाटा सा नजर आने लगा है। सार्वजनिक परिवहन पर चुनावी तैयारियों का सीधा असर पड़ा है, जिससे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

चुनावी ड्यूटी में बसों का इस्तेमाल

दरअसल, प्रशासन ने चुनावी ड्यूटी के लिए बड़े पैमाने पर बसों को अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है। सोमवार से ही सरकारी और निजी बसों को सड़कों से हटाया जा रहा है, ताकि उनका उपयोग केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीएपीएफ) और पुलिस कर्मियों के आवागमन में किया जा सके। यही वजह है कि शहर में बसों की संख्या अचानक कम हो गई है और यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रोजाना चलती है करीब 3000 निजी बसें

जानकारी के मुताबिक, कोलकाता और आसपास के इलाकों में रोजाना करीब 3000 निजी बसें चलती हैं। लेकिन अब तक लगभग 1600 बसों को चुनावी कार्यों के लिए अधिग्रहित कर लिया गया है। यानी करीब आधी बसें पहले ही सड़कों से गायब हो चुकी हैं। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, छात्र और रोजाना सफर करने वाले लोग खासे परेशान हैं। कई जगहों पर बस स्टॉप पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

40 प्रतिशत बसों का संचालन जारी रखने की मांग

बस यूनियनों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि चुनाव जरूरी है, लेकिन शहर की आम जनता को पूरी तरह असुविधा में डालना ठीक नहीं है। यूनियन ने प्रशासन से मांग की है कि कम से कम 40 प्रतिशत बसों का संचालन जारी रखा जाए, ताकि शहर की रफ्तार बनी रहे और लोगों को राहत मिल सके।

सिटी सबअर्बन बस सर्विस के महासचिव टिटू साहा ने बताया कि चुनावी ड्यूटी में बसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। आम दिनों में जहां बसें 140 से 200 किलोमीटर तक चलती हैं, वहीं चुनाव के दौरान इन्हें 500 से 600 किलोमीटर तक चलाना पड़ सकता है। इससे बसों की स्थिति पर भी असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर परिवहन विभाग को पत्र भी लिखा है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है।

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