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पश्चिम बंगाल में खिला ‘कमल’, अब कौन बनेगा भाजपा का पहला मुख्यमंत्री? मंथन तेज

पश्चिम बंगाल में खिला ‘कमल’, अब कौन बनेगा भाजपा का पहला मुख्यमंत्री? मंथन तेज
पश्चिम बंगाल में खिला ‘कमल’, अब कौन बनेगा भाजपा का पहला मुख्यमंत्री? मंथन तेज

पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि राज्य का पहला भाजपा मुख्यमंत्री कौन बनेगा। शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे माने जा रहे हैं, जबकि दिलीप घोष समेत अन्य नाम भी चर्चा में हैं। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की बैठक में होगा।

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Dipali Kumari
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West Bengal CM: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार इतिहास रच गया है। पहली बार भाजपा ने राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाते हुए बड़ा जनादेश हासिल किया है। लंबे समय तक चली सियासी जंग के बाद अब नतीजे साफ हैं, बंगाल में ‘कमल’ खिल चुका है। नतीजे आने के बाद नई सरकार के गठन की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इसी बीच शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय हो गई है। बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने घोषणा की है कि 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर राज्य का पहला भाजपा मुख्यमंत्री कौन होगा?

बंगाल का बेटा ही बनेगा मुख्यमंत्री- अमित शाह

चुनाव प्रचार के दौरान ही भाजपा ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा था कि पार्टी बंगाल के किसी “माटी के बेटे” को ही मुख्यमंत्री बनाएगी। अब जब जीत पक्की हो चुकी है, तो पार्टी के अंदर मंथन तेज हो गया है। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही कोलकाता पहुंच सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वे विधायकों के साथ बैठक कर उनकी राय लेंगे, जिसके बाद अंतिम फैसला संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में इस नाम पर मुहर लग सकती है।

शुभेंदु अधिकारी के नाम की चर्चा सबसे तेज

अगर दावेदारों की बात करें, तो सबसे मजबूत नाम शुभेंदु अधिकारी का सामने आ रहा है। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी अहम सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है। खास बात यह है कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी हराकर बड़ा संदेश दिया है। ऐसे में उनके नाम को सबसे आगे माना जा रहा है।

इन नामों पर भी हो सकता है विचार

हालांकि, पार्टी के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। दिलीप घोष, स्वपन दासगुप्ता और शामिक भट्टाचार्य जैसे नेता भी इस दौड़ में शामिल हैं। भाजपा नेतृत्व जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ संगठन में योगदान को भी ध्यान में रखकर फैसला करेगा।

बंगाल के लिए यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा किस चेहरे को आगे कर राज्य की बागडोर सौंपती है। फैसला चाहे जो भी हो, इतना तय है कि बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।