West Bengal Election Bike Ban: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने चुनावी माहौल में बड़ा बदलाव ला दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए 48 घंटे के बाइक और स्कूटी बैन को रद्द करते हुए साफ कहा कि निष्पक्ष चुनाव के नाम पर आम नागरिकों की सामान्य जिंदगी पर पूरी तरह रोक लगाना उचित नहीं है। कोर्ट के इस फैसले से लाखों लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो रोजमर्रा के काम, नौकरी, पढ़ाई और जरूरी जरूरतों के लिए दोपहिया वाहनों पर निर्भर हैं।
क्या कहा अदालत ने ?
जस्टिस कृष्णा राव की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग के पास स्वतंत्र और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित कराने के व्यापक अधिकार जरूर हैं, लेकिन इन अधिकारों का इस्तेमाल संवैधानिक सीमाओं और तर्कसंगत तरीके से होना चाहिए। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहले से ही बड़ी संख्या में केंद्रीय बल और स्थानीय पुलिस तैनात हैं। ऐसे में सभी नागरिकों पर एक साथ कठोर प्रतिबंध लगाना संतुलित फैसला नहीं माना जा सकता।
वोटिंग के दिन रहेगी पाबंदी
हालांकि कोर्ट ने पूरी तरह राहत देने के साथ कुछ जरूरी सावधानियां भी बरकरार रखी हैं। चुनाव वाले दिन 29 अप्रैल को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पिलियन राइडिंग यानी दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने पर 12 घंटे की रोक जारी रहेगी। लेकिन इसमें भी मेडिकल इमरजेंसी, वोट डालने जाने या पारिवारिक जरूरतों जैसी परिस्थितियों में परिवार के सदस्यों को छूट दी गई है।
बाइक रैलियों पर रोक
दूसरी ओर, अदालत ने बाइक रैलियों पर 48 घंटे की रोक को बरकरार रखा है। कोर्ट का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले बाइक रैलियां तनाव और हिंसा को बढ़ावा दे सकती हैं, इसलिए इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक जरूरी है। यानी आम लोगों की सुविधा को राहत मिली है, लेकिन चुनावी माहौल को शांत रखने के लिए सख्ती भी जारी रहेगी।
चुनाव आयोग ने लगाया था प्रतिबंध
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 20 अप्रैल को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दोपहिया वाहनों के उपयोग, पिलियन राइडिंग और बाइक रैलियों पर व्यापक प्रतिबंध लगाया था। इस फैसले की विपक्षी दलों, आम जनता और कई सामाजिक संगठनों ने आलोचना की थी। बाद में कुछ सेवाओं जैसे ओला, उबर, स्विगी और जोमैटो को छूट दी गई थी, लेकिन मामला कोर्ट तक पहुंच गया।