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Paschim Bardhaman News: जमीन के पट्टे के नाम पर पैसे लेने के आरोप को लेकर दुर्गापुर में अनोखा विरोध

Paschim Bardhaman News: जमीन के पट्टे के नाम पर पैसे लेने के आरोप को लेकर दुर्गापुर में अनोखा विरोध
TMC leader omelet protest land patta scam: जमीन के पट्टे के नाम पर पैसे लेने के आरोप को लेकर दुर्गापुर में अनोखा विरोध (Image: AI)

TMC leader omelet protest land patta scam: दुर्गापुर के महानंदा कॉलोनी इलाके में जमीन का पट्टा दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप को लेकर लोगों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि वर्षों बाद भी न पट्टा मिला और न पैसे वापस हुए। पूर्व पार्षद की अनुपस्थिति में उनके करीबी बताए जाने वाले नेता सुकुमार चक्रवर्ती को ऑमलेट खिलाकर लोगों ने जवाब मांगा।

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Asfi Shadab
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जमीन के पट्टे को लेकर लोगों में बढ़ी नाराजगी

TMC leader omelet protest land patta scam: दुर्गापुर (पश्चिम बर्धमान): जमीन का सरकारी पट्टा दिलाने के नाम पर आम लोगों से पैसे लेने के आरोप को लेकर दुर्गापुर के वार्ड नंबर 41 में शनिवार को अनोखा विरोध-प्रदर्शन हुआ। विदाई ले चुके तृणमूल पार्षद शिपुल साहा के न मिलने पर गुस्साए इलाकावासियों ने उनके करीबी माने जाने वाले स्थानीय तृणमूल नेता सुकुमार चक्रवर्ती को डिमलेट (अंडे का ऑमलेट) खिलाकर प्रतीकात्मक विरोध जताया।

मौके पर पहुँचे संवाददाता एकबाल के अनुसार यह घटना दुर्गापुर की महानंदा कॉलोनी में हुई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि करीब चार साल पहले महानंदा कॉलोनी, बीरभानपुर और आसपास के इलाकों के कई लोगों से सरकारी जमीन का पट्टा दिलाने का वादा करके पैसे वसूले गए थे। इतने लंबे समय बाद भी न पट्टा मिला और न रकम वापस आई।

ऑमलेट खिलाकर जताया गया अनोखा विरोध प्रदर्शन

शनिवार रात महानंदा कॉलोनी में एक शिक्षक के घर से पट्टे से संबंधित कई भरे हुए फॉर्म बरामद हुए। इलाकेवासियों का दावा है कि चुनाव परिणाम आने के बाद माहौल प्रतिकूल देखकर कुछ तृणमूल नेताओं ने ये फॉर्म वहाँ छोड़ दिए।

इसके बाद आक्रोशित निवासी हाथों में वे फॉर्म और झाड़ू लेकर सड़क पर उतर आए। शिपुल साहा के करीबी बताए जाने वाले सुकुमार चक्रवर्ती को बुलाकर उन्हें ऑमलेट खिलाया गया और पट्टे के नाम पर जमा रकम का हिसाब माँगा गया। सुकुमार चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और पूरी जानकारी शिपुल साहा ही दे सकते हैं।

अब नजरें शिपुल साहा पर टिकी हैं  इलाकेवासी उनसे सीधे जवाब की माँग कर रहे हैं।


रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।