
भाई दूज 2025: भाई-बहन के स्नेह का पावन पर्व भाई दूज 2025 का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है और इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। भाई दूज भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह को प्रकट करने का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक कर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। भाई भी अपनी ओर से बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन की तरह ही भाई दूज भी भाई-बहन के संबंधों

भाई दूज 2025: भाई-बहन के स्नेह का पावन पर्व भाई दूज 2025 का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है और इसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। भाई दूज भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह को प्रकट करने का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक कर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। भाई भी अपनी ओर से बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन की तरह ही भाई दूज भी भाई-बहन के संबंधों

भाई दूज का पर्व और चार योग संयोग नई दिल्ली। भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है, जो दिवाली के बाद 19 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। इस वर्ष यह पर्व चार शुभ योग संयोग — आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग, जयद् योग — में संपन्न होगा। शुभ मुहूर्त भाई दूज का मुख्य शुभ मुहूर्त दोपहर 01:10 बजे से 03:21 बजे तक रहेगा। इस समय बहनें अपने भाई के माथे पर टीका लगाकर उनकी लंबी उम्र और कुशल जीवन की कामना करेंगी। पूजा विधि और परंपराएं भाई दूज के दिन बहनें यमराज और उनके दूतों की

भाई दूज का पर्व और चार योग संयोग नई दिल्ली। भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है, जो दिवाली के बाद 19 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। इस वर्ष यह पर्व चार शुभ योग संयोग — आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग, जयद् योग — में संपन्न होगा। शुभ मुहूर्त भाई दूज का मुख्य शुभ मुहूर्त दोपहर 01:10 बजे से 03:21 बजे तक रहेगा। इस समय बहनें अपने भाई के माथे पर टीका लगाकर उनकी लंबी उम्र और कुशल जीवन की कामना करेंगी। पूजा विधि और परंपराएं भाई दूज के दिन बहनें यमराज और उनके दूतों की

चित्रगुप्त पूजा का महत्व हिंदू पंचांग के अनुसार, चित्रगुप्त पूजा कार्तिक शुक्ल द्वितीया, अर्थात भाई दूज के दिन आयोजित की जाती है। यह विशेष पूजा मुख्य रूप से कायस्थ समाज के लोगों द्वारा संपन्न की जाती है। भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक होने के साथ-साथ सभी जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। मान्यता है कि उनकी पूजा से पापों का नाश होता है और ज्ञान व बुद्धि की प्राप्ति होती है। पूजा सामग्री की सूची पूजा को पूर्ण और लाभकारी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री इस प्रकार है: भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या मूर्ति सफेद कागज, कलम, दवात और

चित्रगुप्त पूजा का महत्व हिंदू पंचांग के अनुसार, चित्रगुप्त पूजा कार्तिक शुक्ल द्वितीया, अर्थात भाई दूज के दिन आयोजित की जाती है। यह विशेष पूजा मुख्य रूप से कायस्थ समाज के लोगों द्वारा संपन्न की जाती है। भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक होने के साथ-साथ सभी जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। मान्यता है कि उनकी पूजा से पापों का नाश होता है और ज्ञान व बुद्धि की प्राप्ति होती है। पूजा सामग्री की सूची पूजा को पूर्ण और लाभकारी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री इस प्रकार है: भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर या मूर्ति सफेद कागज, कलम, दवात और