
भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल जनवरी माह में मनाया जाता है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार का मकर संक्रांति पर्व बेहद खास होने वाला है क्योंकि कई वर्षों के बाद षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का संयोग एक साथ बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। क्यों खास है इस बार की मकर संक्रांति इस साल मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से पुण्यदायक माना जा रहा है। ज्योतिषीय

भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल जनवरी माह में मनाया जाता है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस बार का मकर संक्रांति पर्व बेहद खास होने वाला है क्योंकि कई वर्षों के बाद षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का संयोग एक साथ बन रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। क्यों खास है इस बार की मकर संक्रांति इस साल मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से पुण्यदायक माना जा रहा है। ज्योतिषीय

Makar Sankranti 2026: भारत में पर्व केवल तिथियों का मेल नहीं होते, बल्कि वे आस्था, परंपरा और जीवन-दृष्टि का संगम होते हैं। इस वर्ष 14 जनवरी को ऐसा ही एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। यह संयोग बीते 126 वर्षों में केवल दूसरी बार बना है। इससे पहले वर्ष 2003 में ऐसा योग देखने को मिला था। ऐसे में आम श्रद्धालुओं से लेकर बड़े दानदाताओं तक के मन में एक स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है—क्या इस दिन खिचड़ी का दान किया जाए या एकादशी के नियमों के कारण

Makar Sankranti 2026: भारत में पर्व केवल तिथियों का मेल नहीं होते, बल्कि वे आस्था, परंपरा और जीवन-दृष्टि का संगम होते हैं। इस वर्ष 14 जनवरी को ऐसा ही एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। यह संयोग बीते 126 वर्षों में केवल दूसरी बार बना है। इससे पहले वर्ष 2003 में ऐसा योग देखने को मिला था। ऐसे में आम श्रद्धालुओं से लेकर बड़े दानदाताओं तक के मन में एक स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है—क्या इस दिन खिचड़ी का दान किया जाए या एकादशी के नियमों के कारण

नए साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही ग्रहों की चाल में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने वाले हैं। खगोलीय घटनाओं की दृष्टि से यह साल बेहद खास माना जा रहा है। इसी कड़ी में मकर संक्रांति के कुछ दिनों बाद एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है। इस दौरान पांच ग्रह एक साथ मकर राशि से गुजरेंगे, जिससे पंचग्रही राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में इस तरह के योग को बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है। इस योग के बनने से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे, वहीं कुछ राशियों को

नए साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही ग्रहों की चाल में कई महत्वपूर्ण बदलाव होने वाले हैं। खगोलीय घटनाओं की दृष्टि से यह साल बेहद खास माना जा रहा है। इसी कड़ी में मकर संक्रांति के कुछ दिनों बाद एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है। इस दौरान पांच ग्रह एक साथ मकर राशि से गुजरेंगे, जिससे पंचग्रही राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में इस तरह के योग को बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है। इस योग के बनने से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे, वहीं कुछ राशियों को

कर संक्रांति का त्योहार हमारे देश में बड़े उल्लास और खुशी के साथ मनाया जाता है। इस दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाना एक पुरानी परंपरा रही है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इस खेल में बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। छतों पर रंगीन पतंगें, काटो-काटो की आवाजें और खुशी की किलकारियां इस त्योहार की पहचान हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस खुशी के त्योहार पर एक काला साया मंडरा रहा है। नायलॉन मांजे के इस्तेमाल ने इस पवित्र उत्सव को खतरनाक बना दिया है। हर साल मकर संक्रांति के आसपास ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आती हैं

कर संक्रांति का त्योहार हमारे देश में बड़े उल्लास और खुशी के साथ मनाया जाता है। इस दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाना एक पुरानी परंपरा रही है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इस खेल में बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। छतों पर रंगीन पतंगें, काटो-काटो की आवाजें और खुशी की किलकारियां इस त्योहार की पहचान हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस खुशी के त्योहार पर एक काला साया मंडरा रहा है। नायलॉन मांजे के इस्तेमाल ने इस पवित्र उत्सव को खतरनाक बना दिया है। हर साल मकर संक्रांति के आसपास ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आती हैं