Jeffrey Epstein Death Case: हाई-प्रोफाइल अपराधी के रूप में चर्चित रहे Jeffrey Epstein की मौत को लगभग 7 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन यह मामला आज भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में उनकी मौत को आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया था। उस समय कहा गया कि उन्होंने अपनी कोठरी में फांसी लगाकर जान दे दी। परंतु अब सामने आए नए दस्तावेजों ने एक बार फिर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
मामले से जुड़ी हालिया फाइलों और बयानों को देखने के बाद ऐसा लगता है कि कहानी उतनी सीधी नहीं है, जितनी पहले बताई गई थी।
न्याय विभाग की हालिया फाइलों में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं, जो आधिकारिक रिपोर्ट से मेल नहीं खाते। विशेष रूप से पोस्टमार्टम से जुड़े बयान और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
गला घोंटने का दावा
प्रसिद्ध फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. माइकल बेडन ने, जो एप्स्टीन के परिवार के अनुरोध पर पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े थे, दावा किया कि गर्दन पर पाए गए निशान सामान्य फांसी से मेल नहीं खाते। उनके अनुसार, हड्डियों की टूट-फूट और निशानों की प्रकृति ‘गला घोंटने’ की ओर इशारा करती है।
यदि यह दावा सही है, तो आत्महत्या की आधिकारिक थ्योरी कमजोर पड़ती है। हालांकि सरकार अब भी इसे आत्महत्या ही मानती है, लेकिन डॉक्टर का बयान लोगों के मन में संदेह पैदा करता है।
मौत से पहले की रहस्यमयी घटनाएं
जेल दस्तावेज बताते हैं कि 23 जुलाई 2019 को एप्स्टीन अपनी कोठरी में अर्ध-बेहोश अवस्था में पाए गए थे। उनके गले में एक फंदा था। उस समय इसे आत्महत्या की कोशिश बताया गया।
लेकिन बाद में एप्स्टीन ने कथित तौर पर मनोवैज्ञानिक से कहा था कि वह मरना नहीं चाहते। उन्होंने जीवन के प्रति लगाव जताया था। यह बयान आत्महत्या की कहानी को और जटिल बना देता है।
‘टाइपो’ या पूर्वनिर्धारित दस्तावेज?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में मौत का मसौदा 9 अगस्त को तैयार बताया गया, जबकि आधिकारिक मृत्यु 10 अगस्त को हुई। इसे महज ‘टाइपो’ कहा गया, लेकिन इतनी बड़ी घटना में तारीख की गलती साधारण भूल नहीं मानी जा सकती।
एक आम नागरिक के रूप में सोचें तो क्या ऐसे संवेदनशील दस्तावेज में तारीख की गलती सहज रूप से स्वीकार की जा सकती है?
जेल सुरक्षा में गंभीर चूक
जांच में यह भी सामने आया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही पालन नहीं हुआ। नियम के अनुसार एप्स्टीन को अकेला नहीं छोड़ा जाना था, फिर भी उन्हें सेल में अकेला पाया गया।
ड्यूटी पर तैनात दो गार्ड कथित रूप से कई घंटे तक सोते रहे। रिकॉर्ड में उन्होंने नियमित जांच का उल्लेख किया, जबकि सीसीटीवी और अन्य रिपोर्ट कुछ और कहानी कहती हैं। बाद में उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ, लेकिन आरोप हटा दिए गए।
यह सवाल उठता है कि इतनी बड़ी चूक केवल लापरवाही थी या कुछ और?
सीसीटीवी फुटेज का रहस्य
घटना की रात सीसीटीवी फुटेज में एक ‘नारंगी रंग की परछाईं’ सीढ़ियों की ओर जाती दिखाई दी। अधिकारियों ने कहा कि वह कोई गार्ड हो सकता है, जो चादरें ले जा रहा था।
लेकिन यह स्पष्टीकरण अब भी लोगों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाया है। फुटेज की गुणवत्ता और उसकी व्याख्या पर भी बहस जारी है।
क्या घटना स्थल बदला गया?
जब गार्ड ने एप्स्टीन को लटका हुआ पाया, तो तुरंत उन्हें नीचे उतार दिया गया। कुछ पूर्व जांच अधिकारियों का मानना है कि इससे संभावित सबूतों में बदलाव हो सकता है।
सेल की तस्वीरों को देखकर कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि दृश्य असामान्य प्रतीत होता है। हालांकि यह केवल संदेह है, लेकिन इतने बड़े मामले में हर सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
क्यों नहीं थम रही चर्चा?
एप्स्टीन का मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है। उन पर कई प्रभावशाली लोगों से संबंध रखने और यौन तस्करी के गंभीर आरोप थे। ऐसे में उनकी अचानक मौत ने स्वाभाविक रूप से अटकलों को जन्म दिया।
सात साल बाद भी जब नई फाइलें सामने आती हैं और पुराने सवाल दोबारा उठते हैं, तो यह दिखाता है कि मामला अभी भी लोगों के मन में अधूरा है।
जेफरी एप्स्टीन की मौत को आधिकारिक रूप से आत्महत्या माना गया है, लेकिन हालिया खुलासों ने उस निष्कर्ष पर फिर से प्रश्नचिह्न लगा दिया है। डॉक्टरों के बयान, सुरक्षा चूक, दस्तावेजी विसंगतियां और सीसीटीवी फुटेज—ये सभी पहलू मिलकर इस मामले को आज भी रहस्यमय बनाए हुए हैं।