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विज्ञापन पड़ा भारी! सलमान खान और ह्रितिक रोशन पर केस दर्ज, जानिए क्या है पूरा मामला

विज्ञापन पड़ा भारी! सलमान खान और ह्रितिक रोशन पर केस दर्ज, जानिए क्या है पूरा मामला
विज्ञापन पड़ा भारी! सलमान खान और ह्रितिक रोशन पर केस दर्ज

ओड़िशा के कालाहांडी में कोल्ड ड्रिंक के कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर सलमान खान, ह्रितिक रोशन और पेप्सीको के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में मामला दर्ज हुआ है। एक रुपये के हर्जाने की मांग के साथ यह केस विज्ञापन जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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Dipali Kumari
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Salman-Hrithik Case: बॉलीवुड की चमक-दमक और बड़े सितारों की लोकप्रियता अक्सर विज्ञापनों को विश्वसनीय बना देती है, लेकिन जब यही भरोसा आम उपभोक्ता के लिए भ्रम का कारण बन जाए, तो सवाल सिर्फ सितारों का नहीं, पूरे विज्ञापन तंत्र का बन जाता है। पश्चिम ओड़िशा के कालाहांडी जिले की उपभोक्ता अदालत में दर्ज एक अनोखा मामला इसी सच्चाई को सामने लाता है, जहां सलमान खान और ह्रितिक रोशन जैसे सुपरस्टार्स के साथ-साथ एक नामी कोल्ड ड्रिंक कंपनी और विज्ञापन परिषद को कटघरे में खड़ा किया गया है।

यह मामला न तो करोड़ों रुपये के मुआवजे का है और न ही किसी बड़े व्यावसायिक विवाद का, बल्कि महज एक रुपये के हर्जाने की मांग के साथ उपभोक्ता अधिकारों पर गंभीर बहस छेड़ता है। यही कारण है कि यह केस चर्चा के केंद्र में आ गया है।

उपभोक्ता अदालत में दर्ज हुआ अनोखा मामला

कालाहांडी जिला उपभोक्ता अदालत में खरियार निवासी दीपक दुबे द्वारा यह मामला दायर किया गया है। अदालत में यह याचिका कोल्ड ड्रिंक के एक विज्ञापन को लेकर दाखिल की गई, जिसमें दावा किया गया है कि विज्ञापन ने वास्तविकता से परे जाकर उत्पाद को शक्ति और सफलता का स्रोत बताया।

मामले की पहली सुनवाई 22 दिसंबर को हो चुकी है, जबकि दूसरी सुनवाई 19 जनवरी को प्रस्तावित है। इस बीच सलमान खान, ह्रितिक रोशन, संबंधित कोल्ड ड्रिंक कंपनी और विज्ञापन परिषद की ओर से वकीलों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है।

एक रुपये के दावे ने खींचा सबका ध्यान

इस मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि याचिकाकर्ता ने हर्जाने के रूप में केवल एक रुपये की मांग की है। यह राशि भले ही प्रतीकात्मक हो, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश बेहद गंभीर है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला पैसे के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले विज्ञापनों पर सवाल उठाने के लिए है।

विज्ञापन से उपजा भ्रम

दीपक दुबे के अनुसार, उनके पुत्र ने एक लोकप्रिय कोल्ड ड्रिंक का विज्ञापन देखा, जिसमें इसे पीने से असाधारण ऊर्जा और ताकत मिलने का संकेत दिया गया था। इसी से प्रभावित होकर उनके बेटे ने स्कूल में आयोजित दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया और यह विश्वास किया कि कोल्ड ड्रिंक पीने से वह प्रतियोगिता जीत सकेगा।

लेकिन परिणाम इसके ठीक उलट रहा। प्रतियोगिता में असफलता के बाद बच्चा मानसिक रूप से काफी निराश हो गया। पिता का आरोप है कि यह निराशा भ्रामक विज्ञापन के कारण पैदा हुई, जिसने बच्चे की अपेक्षाओं को अवास्तविक रूप से बढ़ा दिया।

दीपक दुबे का तर्क है कि सलमान खान और ह्रितिक रोशन जैसे सितारों की मौजूदगी ने विज्ञापन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया, जिससे एक मासूम बच्चा भ्रमित हो गया।

कानूनी पक्ष और अगली सुनवाई

मामले में सलमान खान की ओर से वकील अनीश पटनायक, ह्रितिक रोशन और कोल्ड ड्रिंक कंपनी की ओर से कुणाल बेहेरा तथा विज्ञापन परिषद की ओर से अमित जैन अदालत में पक्ष रख रहे हैं।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह केस भविष्य में विज्ञापन नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में एक मिसाल बन सकता है। अदालत यह तय करेगी कि क्या विज्ञापन वास्तव में भ्रामक था और उसमें शामिल चेहरों की जिम्मेदारी किस हद तक बनती है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।