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गारिया के स्कूल में तीन दिन से मिड-डे मील बंद, फंड नहीं मिलने से बढ़ा दुकानदारों का बकाया

गारिया के स्कूल में तीन दिन से मिड-डे मील बंद, फंड नहीं मिलने से बढ़ा दुकानदारों का बकाया
गारिया के एक स्कूल में तीन दिनों से मिड-डे मील बंद है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि तीन महीने से फंड नहीं मिलने के कारण दुकानदारों का हजारों रुपये बकाया हो गया है। (File Photo)

गारिया के एक स्कूल में तीन दिनों से मिड-डे मील बंद है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि तीन महीने से फंड नहीं मिलने के कारण दुकानदारों का हजारों रुपये बकाया हो गया है।

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Shinki Singh
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स्कूल की बढ़ी मुश्किल

दक्षिण 24 परगना के गारिया इलाके के एक स्कूल में पिछले तीन दिनों से मिड-डे मील बंद है। स्कूल प्रबंधन का आरोप है कि करीब तीन महीने से मिड-डे मील के लिए फंड नहीं मिला है। ऐसे में अब तक दुकानदारों से उधार लेकर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही थी। लेकिन उधार की रकम बढ़ने के बाद स्कूल प्रबंधन के सामने मिड-डे मील बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। यह मामला गारिया के एक स्कूल का है। स्कूल के प्रधान शिक्षक के मुताबिक मिड-डे मील के लिए जरूरी सामान उधार लेकर खरीदा जा रहा था। उन्होंने बताया कि फंड के लिए नगरपालिका को कई बार पत्र भी दिया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

दुकानदारों का हजारों रुपये बकाया

स्कूल प्रबंधन के अनुसार करीब 200 से 250 विद्यार्थी मिड-डे मील पर निर्भर हैं। पहले बच्चों को भोजन में मांस, अंडा, सोयाबीन और उबले आलू समेत अन्य खाद्य सामग्री दी जाती थी। लेकिन पिछले तीन दिनों से उन्हें भोजन नहीं मिल पा रहा है। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि किराना दुकानदार का करीब 25 हजार रुपये, अंडे की दुकान का लगभग 9 हजार रुपये और आलू विक्रेता का करीब 12 हजार रुपये बकाया है। दुकानदारों की ओर से लगातार भुगतान की मांग किए जाने के बाद स्कूल प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया। प्रधान शिक्षक का कहना है कि इसी वजह से मिड-डे मील बंद करना पड़ा।

तीन महीने से फंड नहीं मिलने का दावा

प्रधान शिक्षक ने बताया कि पिछले तीन महीने से मिड-डे मील का फंड नहीं आया है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। स्कूल प्रबंधन ने शिक्षकों के सहयोग से किसी तरह अब तक व्यवस्था संभाली लेकिन लगातार बढ़ते बकाये के कारण अब यह संभव नहीं हो पा रहा है। प्रधान शिक्षक के मुताबिक स्कूल में रोजाना करीब 200 से 250 बच्चे मिड-डे मील खाते हैं। भोजन बंद होने से इन विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नगरपालिका ने क्या कहा

राजपुर-सोनारपुर नगरपालिका की ओर से बताया गया कि पिछले तीन महीने से जिले से मिड-डे मील का फंड नहीं मिल रहा है। नगरपालिका के अनुसार पोर्टल बंद होने के कारण भी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। समस्या का जल्द समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से भी मामले की जानकारी लेने और समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया है। अब देखना होगा कि स्कूल में मिड-डे मील की व्यवस्था दोबारा कब शुरू होती है और बच्चों को नियमित रूप से भोजन कब मिल पाता है।


रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।