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सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक

सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक
सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक (File Photo)

सीवान के डीएवी स्नातकोत्तर कॉलेज में ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर विवाद गहरा गया है। शिक्षकों ने छात्रों से वसूली और प्रशासनिक मनमानी के आरोप लगाते हुए कॉलेज परिसर में धरना शुरू किया है।

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Dipali Kumari
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DAV PG College Siwan Protest: बिहार के सिवान स्थित DAV स्नातकोत्तर कॉलेज में इन दिनों माहौल काफी गरमाया हुआ है। संस्थान में पढ़ाई से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप और विरोध-प्रदर्शन की चर्चा हो रही है। विवाद की जड़ ‘महाकाल कंप्यूटर’ नाम की एक व्यवस्था को लेकर बताई जा रही है, जिसे लेकर कॉलेज के कई शिक्षक खुलकर विरोध में उतर आए हैं।

कंप्यूटर कोर्स के नाम पर छात्रों से वसूली

कॉलेज परिसर में शिक्षक संघ के बैनर तले कई शिक्षक धरने पर बैठ गए हैं। धरना दे रहे शिक्षकों के हाथों में ‘महाकाल कंप्यूटर’ लिखी तख्तियां भी देखी जा रही हैं। शिक्षकों का आरोप है कि इस कंप्यूटर कोर्स या व्यवस्था के नाम पर छात्रों से पैसे वसूले जा रहे हैं। उनका सवाल है कि आखिर इस व्यवस्था का संचालन कौन कर रहा है और छात्रों से ली जा रही राशि का फायदा किसे मिल रहा है।

सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक
सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक

कई समस्याओं से जूझ रहे हैं शिक्षक

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से वेतन कटौती, अपमानजनक व्यवहार और महिला शिक्षिकाओं को विशेष अवकाश न देने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कुछ शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें SC/ST केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन से जुड़े लाभ नहीं मिलने और कॉलेज के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता की कमी की बात भी कही जा रही है।

सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक
सीवान के DAV कॉलेज में विवाद, ‘महाकाल कंप्यूटर’ को लेकर धरने पर बैठे शिक्षक

कॉलेज के प्राचार्य ने कहा- सभी आरोप निराधार

हालांकि इन सभी आरोपों को कॉलेज के प्राचार्य रामानंद राम ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने 2025 में कार्यभार संभालने के बाद कॉलेज में अनुशासन लागू किया। उनके मुताबिक पहले कई शिक्षक समय पर कॉलेज नहीं आते थे, इसलिए उनकी उपस्थिति के आधार पर वेतन रोका गया और इसकी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को भेजी गई।

प्राचार्य का यह भी दावा है कि कॉलेज में पारदर्शिता लाने के लिए ठेकेदारी प्रथा खत्म कर टेंडर सिस्टम लागू किया गया, जिससे कुछ लोग नाराज़ हैं और इसी वजह से विरोध हो रहा है। फिलहाल कॉलेज परिसर में धरना जारी है और शिक्षक प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस विवाद का समाधान कैसे और कब निकलता है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।