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केंद्र के दस मिनट डिलीवरी बंद करने के निर्देश पर राघव चड्ढा ने कहा – हमारी जीत हुई

Centre Halts 10-Minute Delivery: राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की जीत बताया, केंद्र के फैसले का किया स्वागत
Centre Halts 10-Minute Delivery: राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स की जीत बताया, केंद्र के फैसले का किया स्वागत (File Photo)

केंद्र सरकार ने प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों को दस मिनट डिलीवरी बंद करने का निर्देश दिया। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो से डिलीवरी वर्कर्स की सुरक्षा के लिए सख्त समय सीमा हटाने को कहा। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स की बड़ी जीत बताते हुए सरकार का धन्यवाद किया और कहा कि मानव जीवन और सम्मान की जीत हुई है।

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देश भर में क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा दस मिनट में सामान पहुंचाने के वादे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। डिलीवरी बॉय और गिग वर्कर्स लगातार इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। अब केंद्र सरकार ने इस मामले में बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को दस मिनट की डिलीवरी की प्रतिबद्धता खत्म करने का निर्देश दिया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स की बड़ी जीत बताया है।

राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, “सत्यमेव जयते। हम सब मिलकर जीते हैं।” उन्होंने हर उस नागरिक का धन्यवाद किया जो मानव जीवन, सुरक्षा और सम्मान के पक्ष में खड़े रहे। उन्होंने गिग वर्कर्स को आश्वासन दिया कि वे और देश की जनता हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी। चड्ढा ने केंद्र सरकार की समय पर लिए गए इस निर्णायक और संवेदनशील हस्तक्षेप के लिए आभार व्यक्त किया।

राघव चड्ढा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “जब किसी राइडर की टीशर्ट, जैकेट या बैग पर दस मिनट लिखा होता है और ग्राहक की स्क्रीन पर टाइमर चलता रहता है, तो यह दबाव बहुत वास्तविक, निरंतर और खतरनाक होता है।” उनका यह बयान डिलीवरी कर्मचारियों पर पड़ने वाले मानसिक और शारीरिक दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

केंद्र सरकार का निर्णय

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से दस मिनट की डिलीवरी की प्रतिबद्धता खत्म करने को कहा है। मंत्रालय ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस बैठक में इन कंपनियों को डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा के हित में अपने प्लेटफॉर्म और प्रचार सामग्री से सख्त डिलीवरी समय सीमा हटाने की सलाह दी गई।

डिलीवरी वर्कर्स पर पड़ता दबाव

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने एक वीडियो बयान में कहा, “जब दस मिनट में डिलीवरी का वादा होता है और ग्राहक के मोबाइल स्क्रीन पर टाइमर चलता रहता है, तो दस मिनट में डिलीवरी का वादा बहुत वास्तविक, निरंतर और खतरनाक हो जाता है। इसकी वजह से डिलीवरी बॉय और राइडर्स पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है। खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने से उनकी जान को खतरा होता है और सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ती है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप और नवाचार के पक्ष में है, लेकिन शोषण का समर्थन कभी नहीं किया जा सकता। यह बयान सरकार की संतुलित सोच को दर्शाता है जहां व्यवसाय के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है।

राघव चड्ढा का गिग वर्कर्स के साथ जुड़ाव

राघव चड्ढा ने लगातार गिग वर्कर्स की उचित मजदूरी, बेहतर काम की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा की मांगों का समर्थन किया है। सोमवार को उन्होंने एक वीडियो जारी किया था जिसमें उन्होंने ब्लिंकिट की वर्दी पहनी थी और एक डिलीवरी राइडर के साथ ऑर्डर पूरा करने के लिए यात्रा की थी। यह पहल डिलीवरी वर्कर्स की समस्याओं को समझने और उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाने का एक प्रयास था।

पिछले साल 31 दिसंबर को राघव चड्ढा ने नए साल की पूर्व संध्या गिग वर्कर्स के साथ बिताई थी। उस समय कई डिलीवरी वर्कर्स देशव्यापी हड़ताल पर थे। चड्ढा ने उनके संघर्ष में उनका साथ देते हुए उनकी मांगों को सरकार और कंपनियों के सामने रखा था।

गिग वर्कर्स की चुनौतियां

गिग वर्कर्स देश भर में लाखों की संख्या में काम कर रहे हैं। ये वर्कर्स किसी स्थायी नौकरी का हिस्सा नहीं होते और प्रति डिलीवरी के आधार पर भुगतान पाते हैं। इन्हें न तो नियमित वेतन मिलता है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ। दस मिनट की डिलीवरी के दबाव ने इनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया था। समय पर डिलीवरी न करने पर इन्हें दंड का भी सामना करना पड़ता था।

सड़क पर तेज गति से गाड़ी चलाने की मजबूरी के कारण कई डिलीवरी वर्कर्स दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। कई राइडर्स ने अपनी जान गंवाई है। मौसम की मार, यातायात की समस्याएं और ग्राहकों के व्यवहार भी इनकी परेशानियों को बढ़ाते हैं।

समाज की जिम्मेदारी

यह फैसला केवल सरकार या कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन वर्कर्स के प्रति संवेदनशील रहे। ग्राहकों को भी समझना होगा कि तेज डिलीवरी की मांग किसी की जान को खतरे में डाल सकती है। थोड़ा इंतजार करना किसी इंसान की जिंदगी बचा सकता है।

राघव चड्ढा के प्रयास और केंद्र सरकार के इस निर्णय ने गिग वर्कर्स की आवाज को बुलंद किया है। यह एक सकारात्मक कदम है जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।

आगे की राह

हालांकि यह फैसला एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह अधिकार मिलने चाहिए।

कंपनियों को भी अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। लाभ कमाने के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण की भी चिंता करनी होगी। सरकार को भी गिग इकोनॉमी के लिए एक व्यापक नीति बनानी चाहिए जो वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा करे।

राघव चड्ढा और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से उम्मीद है कि आने वाले समय में गिग वर्कर्स की स्थिति में सुधार होगा। यह निर्णय एक मिसाल बनेगा कि जब जनता और सरकार मिलकर काम करती है तो सकारात्मक बदलाव संभव है।

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Asfi Shadab

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