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26 जनवरी से पहले दिल्ली हाई अलर्ट पर, परेड देखने वालों के लिए सख्त नियम लागू

26 जनवरी से पहले दिल्ली हाई अलर्ट पर, परेड देखने वालों के लिए सख्त नियम लागू
दिल्ली में हाई अलर्ट, लाल किला और चांदनी चौक इलाके पर खतरे की आशंका (File Photo)

77वें गणतंत्र दिवस की परेड को लेकर दिल्ली में सुरक्षा कड़ी है। दर्शकों को तय नियमों का पालन करना होगा। कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां, ऑपरेशन सिंदूर की झलक, वंदे मातरम् की गूंज और पहली बार भारतीय सिनेमा का विशेष प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

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Dipali Kumari
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Republic Day 2026: राजधानी दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और विकास की झलक देखने को मिलेगी। गणतंत्र दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक आत्मा और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

ऐसे में जो लोग 26 जनवरी को परेड देखने का मन बना रहे हैं, उनके लिए कुछ जरूरी नियम और दिशा-निर्देश जानना बेहद जरूरी है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण प्रशासन ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।

परेड देखने जाते समय क्या ले जा सकते हैं

गणतंत्र दिवस की परेड में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री समेत कई वीवीआईपी और विदेशी अतिथि शामिल होते हैं। इसी वजह से कर्तव्य पथ और उसके आसपास हाई सिक्योरिटी जोन घोषित किया गया है।

अगर आप परेड देखने जा रहे हैं, तो अपने साथ केवल जरूरी सामान ही ले जा सकते हैं। इनमें मोबाइल फोन, परेड का वैध टिकट, फोटो पहचान पत्र, आवश्यक दवाएं और पानी की छोटी बोतल शामिल है। प्रवेश से पहले सभी दर्शकों की कड़ी जांच की जाएगी और नियमों का पालन न करने पर प्रवेश से रोका जा सकता है।

किन चीजों पर पूरी तरह पाबंदी

सुरक्षा कारणों से कई चीजों को परेड स्थल पर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है। मोबाइल चार्जर, इयरफोन, पावर बैंक और किसी भी तरह के बैटरी चालित गैजेट पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।

इसके अलावा रेजर, ब्लेड, चाकू, कैंची, नुकीले औजार, तार, हथौड़ा, ड्रिल मशीन, आरी, तलवार, कटार और पेंचकस जैसे किसी भी औजार को साथ ले जाने की इजाजत नहीं होगी। यदि कोई व्यक्ति इन वस्तुओं के साथ पहुंचता है, तो उसे प्रवेश नहीं मिलेगा।

इन बातों का विशेष ध्यान रखें दर्शक

परेड देखने जाने वाले लोगों से पुलिस और प्रशासन ने कुछ जरूरी अपील की है। दर्शकों को सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करना होगा और केवल निर्धारित एंट्री व एग्जिट गेट का ही इस्तेमाल करना होगा।

कर्तव्य पथ के आसपास बिना अनुमति के फोटो या वीडियो बनाने पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा भारी बैग या गैर-जरूरी सामान साथ ले जाने से बचने की सलाह दी गई है, ताकि जांच प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

जवानों के जोश के आगे फीकी पड़ी ठंड

गणतंत्र दिवस समारोह की फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान राजधानी में रिमझिम बारिश और कड़ाके की ठंड के बावजूद जवानों का उत्साह देखने लायक रहा। सुबह से हो रही ठंड ने भी सैनिकों के जोश को कम नहीं किया।

जब तीनों सेनाओं के जवान कर्तव्य पथ पर कदम से कदम मिलाकर चले, तो दर्शकों के चेहरे गर्व और उत्साह से खिल उठे। इस बार पहली बार भारतीय सेना की भैरव बटालियन की भागीदारी ने रिहर्सल को और भी खास बना दिया।

कर्तव्य पथ पर दिखेगी देश की विविधता

77वें गणतंत्र दिवस की परेड में इस बार झांकियां थीम आधारित होंगी, लेकिन हर झांकी अपनी अलग पहचान और संदेश के साथ नजर आएगी। कर्तव्य पथ पर वंदे मातरम् की गूंज सुनाई देगी और ऑपरेशन सिंदूर की झलक भी देखने को मिलेगी।

कई झांकियों में भारत की संस्कृति, परंपरा और आधुनिक विकास की कहानी दिखाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार पहली बार भारतीय सिनेमा को भी झांकी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए एक नया अनुभव होगा।

30 झांकियां बनेंगी परेड का आकर्षण

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष परेड में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 13 केंद्र सरकार के विभागों की कुल 30 झांकियां शामिल होंगी। इन झांकियों की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र वंदे मातरम् और समृद्धि का मंत्र आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई है।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में गुजरात, छत्तीसगढ़, संस्कृति मंत्रालय और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की झांकियों में इसके गौरवशाली इतिहास को दर्शाया जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर और सिनेमा की झलक

सैन्य मामलों के विभाग की झांकी में पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं हिमाचल प्रदेश की झांकी ‘देव भूमि–वीर भूमि’ की अवधारणा को दिखाएगी और महाराष्ट्र की झांकी में गणेशोत्सव की सांस्कृतिक झलक नजर आएगी।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय की झांकी इस बार खास चर्चा में है, जिसमें ‘भारत कथा: श्रुति, कृति और दृष्टि’ की थीम पर भारतीय सिनेमा की यात्रा दिखाई जाएगी। बताया जा रहा है कि इस प्रस्तुति में मशहूर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली और ऑस्कर विजेता संगीतकार एमएम कीरावनी भी शामिल होंगे।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।