Gir Lions Deaths: गिर के जंगल में शेरों की रहस्यमयी मौतें, बेबेसिया संक्रमण की आशंका से अलर्ट

Gujarat Wildlife : गुजरात के गिर में शेर शावकों की रहस्यमयी मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में बेबेसिया संक्रमण का शक जताया गया है, लेकिन असली कारण अभी लैब रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। सरकार और वन विभाग अलर्ट मोड में हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे संभावित बड़े खतरे का संकेत मान रहे हैं।
विषयसूची

सरकार ने स्वास्थ्य जांच में तेज लाई
Gir Lions Deaths: गुजरात के गिर और उसके आसपास के क्षेत्रों में एशियाई शेरों की मौतों को लेकर वन विभाग और राज्य सरकार सतर्क हो गई है। हाल की घटनाओं में कुछ शेर शावकों की मौत दर्ज की गई है, जिसके बाद पूरे इलाके में निगरानी और स्वास्थ्य जांच तेज कर दी गई है। शुरुआती जांच में इन मौतों का कारण टिक (किलनी) से फैलने वाले बेबेसिया संक्रमण को माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी लैब रिपोर्ट के बाद ही होगी।
10 से अधिक शेरों की निगरानी
ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार गिर के राजस्व क्षेत्रों और जंगल से सटे इलाकों में पिछले कुछ दिनों में कई शेरों, खासकर शावकों की मौत हुई है। कुछ मामलों में संक्रमित लक्षण पाए जाने के बाद शेरों को अलग किया गया है और करीब 10 से अधिक शेरों को निगरानी में रखा गया है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी सैंपल्स को गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भेजा गया है और रिपोर्ट के बाद ही असली कारण सामने आएगा।
संख्या बढ़कर 891 तक पहुंची
गिर वन क्षेत्र दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है, जहां हाल के वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर लगभग 891 तक पहुंच गई है। शेरों की यह बढ़ती आबादी अब जंगल से बाहर राजस्व क्षेत्रों तक फैल चुकी है, जिससे उनके मानव संपर्क और बीमारी फैलने का जोखिम भी बढ़ गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शेरों का इस तरह फैलाव उन्हें संक्रमण और टिक-जनित बीमारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देता है।
पहले भी हो चुकी हैं मौतें
गिर में शेरों की मौतें कोई नई बात नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में यहां समय-समय पर बड़े पैमाने पर मौतें दर्ज की गई हैं। साल 2018 में एक गंभीर घटना में करीब दो दर्जन से अधिक शेरों की मौत हुई थी, जिसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और बेबेसिया संक्रमण को मुख्य कारण माना गया था। उस समय संक्रमण और परजीवी दोनों के संयुक्त प्रभाव से शेरों की स्थिति बिगड़ी थी। इसके बाद 2019–2020 के दौरान भी कई इलाकों में शेरों में टिक-जनित बीमारियों के मामले सामने आए थे, जिसके बाद व्यापक टीकाकरण और निगरानी अभियान चलाया गया था।

किलनी को खत्म करने विशेष अभियान
हाल की घटनाओं के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। वन विभाग की टीमें लगातार फील्ड में मौजूद हैं और शेरों की मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। किलनी को खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें जानवरों की जांच, दवा छिड़काव और संक्रमित क्षेत्रों को सैनिटाइज करने का काम शामिल है। बीमार या कमजोर शेरों को अलग कर इलाज की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
महामारी फैलाव के संकेत नहीं
राज्य सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा की है। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई बैठक में वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संभावित संक्रमण को फैलने से पहले ही नियंत्रित किया जाए। वन मंत्री ने भी कहा है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी बड़े महामारी जैसे फैलाव के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है।
शावकों के लिए ज्यादा घातक
Gir Lions Deaths: विशेषज्ञों के अनुसार अगर यह बेबेसिया संक्रमण साबित होता है तो यह शावकों के लिए ज्यादा घातक हो सकता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। यह परजीवी खून की लाल कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे तेज बुखार, कमजोरी और गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है।
गिर की मौजूदा स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन अभी इसे बड़े स्तर के प्रकोप के रूप में घोषित नहीं किया गया है। असली तस्वीर लैब रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी कि यह सिर्फ स्थानीय संक्रमण है या किसी बड़े स्वास्थ्य संकट की शुरुआत।

