Snake Friendly City Ujjain: महाकाल की नगरी में बनेगा सर्प संरक्षण का मजबूत मॉडल

Snake Conservation: महाकाल की नगरी उज्जैन अब ‘सर्प मित्र नगरी’ के रूप में विकसित होगी। पहल के तहत सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षित सर्प मित्रों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
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तैयार होगा प्रशिक्षित सर्प मित्रों का नेटवर्क
Snake Friendly City Ujjain: महाकाल की नगरी उज्जैन अब धार्मिक पहचान के साथ वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। उज्जैन को ‘सर्प मित्र नगरी’ के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सांपों को बचाना, उनका सुरक्षित रेस्क्यू करना और लोगों को सांपों के बारे में सही जानकारी देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुसार शहर में प्रशिक्षित सर्प मित्रों की टीम तैयार की जाएगी। ये सर्प मित्र घरों, खेतों या अन्य जगहों पर निकलने वाले सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उन्हें उनके प्राकृतिक स्थान पर छोड़ने में मदद करेंगे। इससे सांपों की जान भी बचेगी और लोगों को भी सुरक्षा मिलेगी।
डर नहीं, समझ जरूरी
सांपों को लेकर लोगों में अक्सर डर और गलत धारणाएं होती हैं। कई बार जानकारी की कमी के कारण लोग सांपों को मार देते हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि सांप प्रकृति के लिए बहुत जरूरी जीव हैं। सर्प मित्र योजना के तहत युवाओं और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें सांपों की पहचान, उन्हें सुरक्षित पकड़ने और रेस्क्यू करने की जानकारी दी जाएगी। बारिश के मौसम में अक्सर सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर घरों, खेतों और आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में लोग डर जाते हैं और सांप को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। प्रशिक्षित सर्प मित्र ऐसे मामलों में लोगों की मदद करेंगे और सांपों को सुरक्षित बचाएंगे।
भारत में पाई जाती हैं सांपों की 300 से ज्यादा प्रजातियां
- भारत जैव विविधता के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। यहां सांपों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछ ही प्रजातियां ऐसी हैं, जिनका जहर इंसानों के लिए खतरनाक हो सकता है।
- भारत के प्रमुख जहरीले सांपों में कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। इन्हें भारत के चार प्रमुख जहरीले सांपों में गिना जाता है।
- इसके अलावा भारत में कई ऐसे सांप भी पाए जाते हैं जो जहरीले नहीं होते। इनमें अजगर, धामन (रैट स्नेक) और पानी में रहने वाले कई सांप शामिल हैं। मध्य प्रदेश में भी सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में भी समय-समय पर कोबरा सहित अन्य सांप मिलने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
प्रकृति के संतुलन के लिए जरूरी हैं सांप
- सांप केवल डर पैदा करने वाले जीव नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- सांप बड़ी संख्या में चूहों और छोटे जीवों को खाते हैं। चूहे खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और घरों में रखे अनाज को भी खराब करते हैं। सांप चूहों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
- यदि सांपों की संख्या कम हो जाए तो चूहों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिसका असर खेती और पर्यावरण पर पड़ सकता है
- सांप खाद्य श्रृंखला का भी अहम हिस्सा हैं। कई पक्षी और दूसरे वन्यजीव सांपों पर निर्भर रहते हैं। इसलिए किसी एक प्रजाति के खत्म होने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ सकता है।
- इसके अलावा सांपों के जहर पर वैज्ञानिक शोध भी होते हैं। कई दवाओं के निर्माण में सांपों के विष से मिले तत्वों का उपयोग किया जाता है।
अंधविश्वास छोड़ें, जागरूक बनें
समाज में सांपों को लेकर कई तरह की गलत बातें फैली हुई हैं। लोग अक्सर हर सांप को खतरनाक मान लेते हैं, जबकि ज्यादातर सांप इंसानों से दूर रहना पसंद करते हैं। वे तभी हमला करते हैं, जब उन्हें खतरा महसूस होता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर घर या आसपास सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। सुरक्षित दूरी बनाकर वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प मित्रों को सूचना दें।
सर्प मित्र नगरी से बदलेगी सोच
Snake Friendly City Ujjain: उज्जैन में शुरू होने वाली यह पहल सिर्फ सांपों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की सोच बदलने का भी प्रयास है। प्रशिक्षित सर्प मित्रों की टीम तैयार होने से सांपों की अनावश्यक मौतें कम होंगी और लोगों को समय पर सहायता मिल सकेगी। महाकाल की नगरी से शुरू होने वाली यह पहल इंसान और प्रकृति के बीच बेहतर तालमेल का संदेश देगी। आने वाले समय में उज्जैन धार्मिक नगरी के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी एक मिसाल बन सकता है।

