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एकतरफा तलाक के बाद भी पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का हक बरकरार, जानिए कोर्ट का बड़ा फैसला

एकतरफा तलाक के बाद भी पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का हक बरकरार, जानिए कोर्ट का बड़ा फैसला
Calcutta High Court maintenance right divorce: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि एकतरफा तलाक के बाद भी पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार तब तक बरकरार रहता है जब तक वह दूसरा विवाह न कर ले। (file photo)

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि एकतरफा तलाक के बाद भी पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार तब तक बरकरार रहता है जब तक वह दूसरा विवाह न कर ले।

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Shinki Singh
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कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच कानूनी तौर पर रिश्ता खत्म होने के बाद भी भरण-पोषण के अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति एकतरफा तलाक भी ले लेता है तब भी पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार समाप्त नहीं होता। हालांकि यह अधिकार केवल तभी तक वैध रहेगा जब तक महिला दूसरा विवाह नहीं कर लेती है।

हावड़ा के समर और ज्योत्स्ना पाल का मामला

यह पूरा कानूनी विवाद हावड़ा के उलुबेरिया निवासी समर पाल और उनकी पत्नी ज्योत्स्ना पाल से जुड़ा है। दोनों का विवाह 1995 में हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। पारिवारिक विवाद बढ़ने के बाद जुलाई 2018 में पत्नी ने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद जून 2022 में दोनों का कानूनी तलाक हो गया। तलाक के बाद पत्नी ने अपने लिए 1500 रुपये और बेटी के लिए 2000 रुपये यानी कुल 3500 रुपये मासिक गुजारा भत्ता की मांग की थी।

तलाकशुदा पत्नी का गुजारा भत्ता पाने का पूरा कानूनी हक

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति उदय कुमार की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 125(1) के दायरे में ‘पत्नी’ शब्द के भीतर तलाकशुदा महिला भी शामिल होती है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि पूर्व पत्नी को भरण-पोषण देना पति की कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी है।

स्वस्थ और बालिग बेटी का दावा अदालत ने किया खारिज

अदालत ने पत्नी के हक को तो सुरक्षित रखा, लेकिन बालिग बेटी के भरण-पोषण की मांग को खारिज कर दिया। अदालत के अनुसार चूंकि बेटी बालिग हो चुकी है और पूरी तरह स्वस्थ है इसलिए वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता नहीं पा सकती। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह बेटी ‘हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट’ की धारा 20(3) के तहत सिविल कोर्ट में अलग से कानूनी अपील कर सकती है।

बकाया राशि और वारंट पर पति को राहत

पति की वित्तीय स्थिति को लेकर अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट पर छोड़ दिया गया है। अदालत ने राहत देते हुए निर्देश दिया कि कुल बकाए राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा जमा करने पर पति के खिलाफ जारी वसूली वारंट  पर रोक लगा दी जाएगी। इस दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून केवल सजा देने का जरिया नहीं हो सकता।


रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।