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नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी को घेरने की चाल या बड़ा सियासी दांव

नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी को घेरने की चाल या बड़ा सियासी दांव
Nandigram bypoll: नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए टीएमसी के बागी रीतब्रत गुट ने ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का बड़ा ऐलान किया है। जानिए क्या हैं इसके सियासी मायने।(File Photo)

नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए टीएमसी के बागी रीतब्रत गुट ने ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने का बड़ा ऐलान किया है। जानिए क्या हैं इसके सियासी मायने।

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Shinki Singh
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टीएमसी बागियों के ऑफर से मची हलचल

पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही बंगाल की सियासत गरमा गई है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर एक बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। रीतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले इस बागी खेमे ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का खुला ऑफर देते हुए यह साफ किया है कि अगर वह मैदान में उतरती हैं तो उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा।

भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट रखने की रणनीति

बागी गुट के इस फैसले के पीछे मुख्य उद्देश्य विपक्ष के वोटों का बिखराव रोकना है। तृणमूल के बागी नेता मदन मित्रा और स्थानीय नेता अबू ताहेर ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का मकसद भाजपा को कोई भी मौका न देना है। अक्सर बागी गुट पर यह आरोप लगता रहा है कि वे भाजपा की ‘बी-टीम’ के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में इस प्रस्ताव के जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि उनका मुख्य लक्ष्य भाजपा विरोधी ताकतों को एक मंच पर रखना और ममता बनर्जी की नंदीग्राम सीट पर आसान जीत सुनिश्चित करना है।

नंदीग्राम का सियासी समीकरण और पिछला इतिहास

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर कड़े मुकाबले के बाद ममता बनर्जी को भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक सरगर्मी तब और बढ़ गई जब शुभेंदु अधिकारी ने हालिया चुनावों में भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की और बाद में नंदीग्राम सीट खाली कर दी जिसके चलते अब यहां उपचुनाव की नौबत आई है।

क्या ममता बनर्जी एक बार फिर नंदीग्राम के चुनावी मैदान में उतरेंगी

वर्तमान में निर्वाचन आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि टीएमसी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार होगा। ऐसे में दोनों ही प्रतिद्वंद्वी गुट अपनी जमीनी तैयारी में जुटे हैं लेकिन रीतब्रत गुट के इस अप्रत्याशित प्रस्ताव ने बंगाल की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी एक बार फिर नंदीग्राम के चुनावी मैदान में उतरेंगी या नहीं।


रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।