नागपुर में काली-पीली मारबत की भव्य शोभायात्रा, सामाजिक संदेशों के साथ उमड़ा जनसैलाब

नागपुर मारबत उत्सव की शोभायात्रा: नागपुर में काली-पीली मारबत की भव्य शोभायात्रा निकली, जिसमें हजारों श्रद्धालु और नागरिक शामिल हुए। मारबत के पुतलों पर सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक घटनाओं से जुड़े व्यंग्यात्मक संदेश लगाए गए। करीब सौ साल पुरानी इस परंपरा को आस्था और सामाजिक जुड़ाव से जोड़ा जाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री, पालक मंत्री, अभिनेता जैकी श्रॉफ और अन्य देशों के राजदूत भी पहुंचे।
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नागपुर में काली-पीली मारबत की भव्य शोभायात्रा
नागपुर मारबत उत्सव की शोभायात्रा: नागपुर। अपनी अनूठी परंपरा के लिए देशभर में मशहूर नागपुर का मारबत उत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर की काली और पीली मारबत के पुतलों को विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक घटनाओं पर व्यंग्यात्मक संदेशों से सजाया गया। इन संदेशों के जरिए सरकार से लेकर देश-विदेश की घटनाओं और समाज में हो रहे सही-गलत कार्यों पर कटाक्ष किया गया।
मारबत की शोभायात्रा नेहरू पुतला क्षेत्र से शुरू हुई और हरिहर मंदिर, महल क्षेत्र से होते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए अपने निर्धारित स्थानों पर पहुंची। इस दौरान हजारों श्रद्धालु और नागरिक जुलूस में शामिल हुए और मारबत के दर्शन कर इस पारंपरिक आयोजन का आनंद लिया।
लगभग 100 साल पुरानी इस परंपरा में इस बार मुख्यमंत्री देवेंद्र, पालक मंत्री चंद्रशेखर भवनकाले और बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ भी शामिल हुए। इस आयोजन की खास बात यह रही कि कई देशों के राजदूत भी नागपुर पहुंचे।
सामाजिक संदेशों के साथ उमड़ा जनसैलाब
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मारबत के दर्शन और जुलूस में शामिल होने से जीवन की नकारात्मकता, दुख और तकलीफें दूर होती हैं। कई श्रद्धालु इसे बुराइयों के प्रतीकात्मक अंत के रूप में देखते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से पुतले के दर्शन मात्र से बीमारी या आर्थिक परेशानी दूर होने का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन सामूहिक धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव जरूर होता है सामाजिक जुड़ाव और सामूहिक आस्था से तनाव कम होने और मानसिक संतुष्टि मिलने में मदद मिलती है।
इस तरह मारबत उत्सव केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि नागपुर की सामाजिक एकजुटता और लोकपरंपरा का भी प्रतीक बनकर उभरता है।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

