अध्यक्ष पद का विवाद छोड़िए, दीक्षाभूमि का विकास तेजी से पूरा हो: भदंत सुरेई ससाई

नागपुर में दीक्षाभूमि के विकास कार्यों को लेकर भदंत सुरेई ससाई ने प्रशासन से काम में तेजी लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद का विवाद अपनी जगह है, लेकिन विश्व प्रसिद्ध दीक्षाभूमि के विकास और सौंदर्यीकरण का काम किसी भी हाल में नहीं रुकना चाहिए।
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Deekshabhoomi Nagpur: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति, दीक्षाभूमि के अध्यक्ष और धम्मसेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने कहा है कि अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि विश्व प्रसिद्ध दीक्षाभूमि के विकास और सौंदर्यीकरण का काम बिना रुके तेजी से पूरा किया जाए।
विकास कार्यों का किया निरीक्षण
भदंत ससाई ने आज बुधवार सुबह दीक्षाभूमि परिसर में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की वजह से दीक्षाभूमि की पहचान पूरी दुनिया में है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं और प्रेरणा लेकर लौटते हैं। ऐसे में विकास कार्य किसी भी कारण से नहीं रुकने चाहिए।

जिलाधिकारी और एनएमआरडीए अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन
भदंत ससाई ने इस संबंध में नागपुर के जिलाधिकारी और नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) के अध्यक्ष को ज्ञापन भी सौंपा है। उन्होंने कहा कि धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस में अब केवल चार महीने बचे हैं। इसलिए सभी जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुरक्षा दीवार, मुख्य मंच, 56 फीट ऊंची भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के चबूतरे, बोधिवृक्ष परिसर में सोलर थीम लाइटिंग और अन्य जरूरी विकास कार्य जल्द पूरा करने की मांग की। उनका कहना है कि समय पर काम पूरा होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
अधूरी सुरक्षा दीवार से हो रही परेशानी
भदंत ससाई ने बताया कि पूर्व दिशा की सुरक्षा दीवार का निर्माण अभी अधूरा है, जिससे श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही में परेशानी हो रही है। इसके अलावा दक्षिण दिशा के भव्य प्रवेश द्वार और पूर्व व दक्षिण दिशा की पत्थर की दीवार का निर्माण भी अभी पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि जब तक ये सभी काम पूरे नहीं हो जाते, तब तक पूर्वी प्रवेश द्वार को बंद करना संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि दीक्षाभूमि के महत्व को देखते हुए सभी विकास कार्य तय समय पर पूरे किए जाएं, ताकि धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस से पहले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

