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अध्यक्ष पद का विवाद छोड़िए, दीक्षाभूमि का विकास तेजी से पूरा हो: भदंत सुरेई ससाई

अध्यक्ष पद का विवाद छोड़िए, दीक्षाभूमि का विकास तेजी से पूरा हो: भदंत सुरेई ससाई
अध्यक्ष पद का विवाद छोड़िए, दीक्षाभूमि का विकास तेजी से पूरा हो: भदंत सुरेई ससाई

नागपुर में दीक्षाभूमि के विकास कार्यों को लेकर भदंत सुरेई ससाई ने प्रशासन से काम में तेजी लाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद का विवाद अपनी जगह है, लेकिन विश्व प्रसिद्ध दीक्षाभूमि के विकास और सौंदर्यीकरण का काम किसी भी हाल में नहीं रुकना चाहिए।

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Dipali Kumari
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Deekshabhoomi Nagpur: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति, दीक्षाभूमि के अध्यक्ष और धम्मसेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई ने कहा है कि अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि विश्व प्रसिद्ध दीक्षाभूमि के विकास और सौंदर्यीकरण का काम बिना रुके तेजी से पूरा किया जाए।

विकास कार्यों का किया निरीक्षण

भदंत ससाई ने आज बुधवार सुबह दीक्षाभूमि परिसर में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की वजह से दीक्षाभूमि की पहचान पूरी दुनिया में है। हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं और प्रेरणा लेकर लौटते हैं। ऐसे में विकास कार्य किसी भी कारण से नहीं रुकने चाहिए।

अध्यक्ष पद का विवाद छोड़िए, दीक्षाभूमि का विकास तेजी से पूरा हो: भदंत सुरेई ससाई
अध्यक्ष पद का विवाद छोड़िए, दीक्षाभूमि का विकास तेजी से पूरा हो: भदंत सुरेई ससाई

जिलाधिकारी और एनएमआरडीए अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

भदंत ससाई ने इस संबंध में नागपुर के जिलाधिकारी और नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) के अध्यक्ष को ज्ञापन भी सौंपा है। उन्होंने कहा कि धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस में अब केवल चार महीने बचे हैं। इसलिए सभी जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

उन्होंने सुरक्षा दीवार, मुख्य मंच, 56 फीट ऊंची भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा के चबूतरे, बोधिवृक्ष परिसर में सोलर थीम लाइटिंग और अन्य जरूरी विकास कार्य जल्द पूरा करने की मांग की। उनका कहना है कि समय पर काम पूरा होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

अधूरी सुरक्षा दीवार से हो रही परेशानी

भदंत ससाई ने बताया कि पूर्व दिशा की सुरक्षा दीवार का निर्माण अभी अधूरा है, जिससे श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही में परेशानी हो रही है। इसके अलावा दक्षिण दिशा के भव्य प्रवेश द्वार और पूर्व व दक्षिण दिशा की पत्थर की दीवार का निर्माण भी अभी पूरा नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि जब तक ये सभी काम पूरे नहीं हो जाते, तब तक पूर्वी प्रवेश द्वार को बंद करना संभव नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि दीक्षाभूमि के महत्व को देखते हुए सभी विकास कार्य तय समय पर पूरे किए जाएं, ताकि धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस से पहले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।