Nagpur News: न्यायालयी मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता को बताया सबसे प्रभावी और लाभकारी तरीका

Mediation Best Option Court Dispute Resolution Nagpur: नागपुर जिला न्यायालय में आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम में न्यायाधीश प्रवीण एम. उन्हाले ने कहा कि न्यायालयी मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता सबसे प्रभावी विकल्प है। विशेषज्ञों ने बताया कि इससे विवाद कम समय और कम खर्च में सुलझाए जा सकते हैं। कार्यक्रम में व्यापारिक मामलों, कानूनी प्रक्रिया और मध्यस्थता के लाभों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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मध्यस्थता से विवादों का समाधान आसान
Mediation Best Option Court Dispute Resolution Nagpur: नागपुर जिला न्यायालय के सभागार में आयोजित जनजागरूकता कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश प्रवीण एम. उन्हाले ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और न्याय मिलने में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए मध्यस्थता (मेडिएशन) विवाद समाधान का सबसे प्रभावी और लाभकारी माध्यम साबित हो रही है।
यह कार्यक्रम प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष शेखर सी. मुनघाटे के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
न्यायाधीश उन्हाले ने कहा, “कई मामलों में पक्षकारों को वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस दौरान समय और धन दोनों की भारी हानि होती है। इतना लंबा संघर्ष करने के बाद भी यह आवश्यक नहीं कि न्यायालय का निर्णय दोनों पक्षों को संतुष्ट कर सके।” उन्होंने कहा कि आपसी संवाद और सहमति से मध्यस्थता अपनाने पर विवाद कम समय, कम खर्च और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझ सकता है, जिससे दोनों पक्षों के संबंध भी बेहतर बने रहते हैं।
सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश आर. पी. पांडे ने वास्तविक उदाहरणों से मध्यस्थता प्रक्रिया और उसके लाभ समझाए। वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षित मध्यस्थ राजेंद्र राठी ने कहा कि दोनों पक्ष बातचीत को तैयार हों तो अधिकांश विवाद मध्यस्थता से आसानी से सुलझ सकते हैं।
कम समय और कम खर्च में मिल सकता है समाधान
व्यावसायिक मामलों के प्रशिक्षित मध्यस्थ एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट गणेरीवाल ने बताया कि व्यापारिक विवादों के अंतिम निर्णय में अक्सर 10 से 15 वर्ष लग जाते हैं। इतने लंबे समय तक 10 लाख रुपये फंसे रहने पर महंगाई से राशि का वास्तविक मूल्य घट जाता है और पूंजी की कमी से व्यवसाय बंद होने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए मध्यस्थता से शीघ्र समाधान आर्थिक नुकसान रोकता है और व्यावसायिक संबंध सुरक्षित रखता है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और अधिवक्ताओं के लिए प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने व्यावहारिक प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन अधिवक्ता उन्नति बोबडे ने किया।
आने वाले समय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सकता है ताकि अधिक से अधिक पक्षकार मध्यस्थता का लाभ उठा सकें।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

