नागपुर में भूपति की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर विवाद, जन संघर्ष समिति ने उठाए सवाल

नागपुर की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में पूर्व नक्सली भूपति की नियुक्ति पर विवाद बढ़ गया है। जन संघर्ष समिति ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए पुनर्विचार की मांग की है।
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भूपति की नियुक्ति ने खड़े किए कई प्रशासनिक और नैतिक सवाल
नागपुर में गोंडवाना विश्वविद्यालय में गढ़चिरौली के पूर्व नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति की प्रशासनिक समन्वयक के रूप में नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भूपति लंबे समय तक गढ़चिरौली के घने जंगलों में नक्सली आंदोलन से जुड़े रहे हैं और बाद में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे। अब ‘जन संघर्ष समिति’ ने उनकी नियुक्ति का विरोध करते हुए इसे नक्सली हिंसा के पीड़ितों और शहीद जवानों के परिवारों की भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताया है।
पुनर्वास का स्वागत, प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल
जन संघर्ष समिति ने कहा है कि भूपति के हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने के फैसले का वह विरोध नहीं करती। हालांकि समिति का तर्क है कि आत्मसमर्पण के बाद भी अतीत से जुड़े गंभीर आरोपों और कानूनी मामलों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।समिति के अनुसार दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे गढ़चिरौली के आदिवासी समाज हिंसा में अपनों को खोने वाले परिवारों और शहीद जवानों के परिजनों के बीच इस नियुक्ति को लेकर असंतोष है। समिति का कहना है कि संवेदनशील प्रशासनिक पद पर नियुक्ति से पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की पूरी तरह जांच होनी चाहिए।
कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक नियुक्ति पर रोक की मांग
समिति के अध्यक्ष दत्ता शिर्के ने सवाल उठाया है कि जिन व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले रहे हों उन्हें आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े संवेदनशील प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी देना कितना उचित है। समिति ने भूपति की नियुक्ति पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। उसका कहना है कि जब तक उनके खिलाफ लंबित कानूनी मामलों और प्रकरणों की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक नियुक्ति को स्थगित किया जाना चाहिए। समिति ने जरूरत पड़ने पर नियुक्ति रद्द करने की मांग भी की है।
पुनर्वास नीति और पीड़ितों के न्याय के बीच संतुलन
दूसरी ओर, पुनर्वास नीति से जुड़े विशेषज्ञों और नीति-निर्धारकों का एक वर्ग मानता है कि मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व नक्सलियों का पुनर्वास आंतरिक सुरक्षा और समाज में स्थायी शांति के लिए महत्वपूर्ण है। उनका तर्क है कि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलने से उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में बने रहने में मदद मिलती है। हालांकि भूपति की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों ने पुनर्वास नीति और नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के न्याय व भावनाओं के बीच संतुलन का मुद्दा सामने ला दिया है। अब इस मामले में कानूनी स्थिति, नियुक्ति के नियमों और पुनर्वास नीति के तहत सरकार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र
एडिट: शिंकी सिंह

