Rashtra Bharat Logo

नागपुर में भूपति की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर विवाद, जन संघर्ष समिति ने उठाए सवाल

नागपुर में भूपति की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर विवाद, जन संघर्ष समिति ने उठाए सवाल
Bhupati Gondwana University Appointment: नागपुर की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में पूर्व नक्सली भूपति की नियुक्ति पर विवाद बढ़ गया है। जन संघर्ष समिति ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए पुनर्विचार की मांग की है। (File photo)

नागपुर की गोंडवाना यूनिवर्सिटी में पूर्व नक्सली भूपति की नियुक्ति पर विवाद बढ़ गया है। जन संघर्ष समिति ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए पुनर्विचार की मांग की है।

Updated:
·by
Shinki Singh
Shinki Singh
Share:

विषयसूची

भूपति की नियुक्ति ने खड़े किए कई प्रशासनिक और नैतिक सवाल

नागपुर में गोंडवाना विश्वविद्यालय में गढ़चिरौली के पूर्व नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति की प्रशासनिक समन्वयक के रूप में नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भूपति लंबे समय तक गढ़चिरौली के घने जंगलों में नक्सली आंदोलन से जुड़े रहे हैं और बाद में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे। अब ‘जन संघर्ष समिति’ ने उनकी नियुक्ति का विरोध करते हुए इसे नक्सली हिंसा के पीड़ितों और शहीद जवानों के परिवारों की भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताया है।

पुनर्वास का स्वागत, प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल

जन संघर्ष समिति ने कहा है कि भूपति के हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने के फैसले का वह विरोध नहीं करती। हालांकि समिति का तर्क है कि आत्मसमर्पण के बाद भी अतीत से जुड़े गंभीर आरोपों और कानूनी मामलों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।समिति के अनुसार दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे गढ़चिरौली के आदिवासी समाज हिंसा में अपनों को खोने वाले परिवारों और शहीद जवानों के परिजनों के बीच इस नियुक्ति को लेकर असंतोष है। समिति का कहना है कि संवेदनशील प्रशासनिक पद पर नियुक्ति से पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की पूरी तरह जांच होनी चाहिए।

कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक नियुक्ति पर रोक की मांग

समिति के अध्यक्ष दत्ता शिर्के ने सवाल उठाया है कि जिन व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले रहे हों उन्हें आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े संवेदनशील प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी देना कितना उचित है। समिति ने भूपति की नियुक्ति पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। उसका कहना है कि जब तक उनके खिलाफ लंबित कानूनी मामलों और प्रकरणों की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक नियुक्ति को स्थगित किया जाना चाहिए। समिति ने जरूरत पड़ने पर नियुक्ति रद्द करने की मांग भी की है।

पुनर्वास नीति और पीड़ितों के न्याय के बीच संतुलन

दूसरी ओर, पुनर्वास नीति से जुड़े विशेषज्ञों और नीति-निर्धारकों का एक वर्ग मानता है कि मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व नक्सलियों का पुनर्वास आंतरिक सुरक्षा और समाज में स्थायी शांति के लिए महत्वपूर्ण है। उनका तर्क है कि आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलने से उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में बने रहने में मदद मिलती है। हालांकि भूपति की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों ने पुनर्वास नीति और नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के न्याय व भावनाओं के बीच संतुलन का मुद्दा सामने ला दिया है। अब इस मामले में कानूनी स्थिति, नियुक्ति के नियमों और पुनर्वास नीति के तहत सरकार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

एडिट: शिंकी सिंह

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Shinki Singh

Shinki Singh

शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।