Nagpur News: “क्या मनुष्य ने नियम बनाया मनुष्य के लिए?” नागपुर में विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन की चौपाल में गहन परिचर्चा

Vidarbha Hindi Sahitya Sammelan Nagpur chaupaal discussion: नागपुर में आयोजित एक परिचर्चा में समाज में नियमों के महत्व पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि नियमों का पालन करने से जीवन में अनुशासन आता है और समाज मजबूत बनता है। कार्यक्रम में कई उदाहरणों के जरिए नियमों के पालन और उनके प्रभाव को समझाया गया।
विषयसूची
नियमों का पालन समाज को देता है शक्ति और दिशा
Vidarbha Hindi Sahitya Sammelan Nagpur chaupaal discussion: नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में उपक्रम चौपाल के अंतर्गत “क्या, मनुष्य ने नियम बनाया मनुष्य के लिए?” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन श्री विजय तिवारी तथा सहसंयोजन श्री हेमंत कुमार पांडे ने किया।
परिचर्चा के मुख्य अतिथि श्री हेमंत देवनाथ तिवारी, ब्रांच सुपरवाइजर, इंटर एक्टिव प्रिंटिंग सॉल्यूशन, किंगडम ऑफ़ बहरीन, गल्फ, विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा – “प्रचलित नियमों का पालन होता है तो समाज ऊर्जावान होकर देश की समृद्धि व प्रगति में सहायक होता है।”
चौपाल की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। श्री मदनगोपाल बाजपेई, श्री धीरज दुबे और श्री पदमदेव दुबे ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र व सम्मान चिन्ह से स्वागत किया।
दैनिक जीवन में नियमों की भूमिका
परिचर्चा में अनेक वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए –
श्री मदनगोपाल वाजपेई ने परिवार, समाज, स्कूल और प्रशासन में नियमों के पालन, उल्लंघन और उनके परिणामों पर दैनिक उदाहरणों सहित विस्तृत चर्चा की।
श्री धीरज दुबे ने कोरोना काल में नियमों के पालन के उदाहरण देते हुए दैनिक जीवन में भी अनुशासन अपनाने की प्रेरणा दी।
डॉ. बच्चू पांडे ने लॉकडाउन के दौरान समाज सेवा के अनुभव साझा किए और बताया कि सेवाकाल के अंतिम समय में प्रताड़ना के विरुद्ध कानून ने किस प्रकार उनकी सहायता की।
श्री पदमदेव दुबे ने प्रशासनिक उदासीनता के कारण मध्यस्थ वर्ग की अनिवार्यता पर अपने जीवन के अनुभव प्रस्तुत किए।
श्री लक्ष्मी नारायण केसर ने संक्षेप में नियमों की महत्ता और अनिवार्यता पर अपने विचार रखे।
श्रीमती माया शर्मा ने शैक्षिक, पारिवारिक और दैनिक जीवन में नियमों के लाभ और उपयोगिता पर उदाहरण सहित चर्चा की।
सहसंयोजक श्री हेमंत कुमार पांडे ने ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर समाज में असमानता और वैमनस्यता की चर्चा की। उन्होंने ब्रिटिश शासनकाल के कानूनों – शहरी भूमि अधिनियम, भूदान यज्ञ, शस्त्र धारण अधिनियम – की अनिवार्यता और उल्लंघन के उदाहरण प्रस्तुत किए। साथ ही वर्तमान में प्रचलित मंदिर अधिग्रहण अधिनियम, एट्रोसिटी एक्ट, यूजीसी एक्ट, आरक्षण नियम, पॉस्को एक्ट, ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक्ट, एंटी ड्रग एक्ट, जनसंख्या नियंत्रण कानून, CAA, NRC, SIR जैसे अनेक कानूनों की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने एक मानवतावादी काव्य पंक्ति भी प्रस्तुत की –
“यही पशु प्रवृत्ति है कि जो आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए जिए, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।”
अंत में उन्होंने “समर्थ को नहीं दोष गोसाईं” उद्गार की दुरुपयोगिता पर टिप्पणी करते हुए अपनी बात समाप्त की।
मुख्य अतिथि श्री हेमंत देवनाथ तिवारी ने बचपन से ही परिवार में संस्कारों की नींव डालकर जीवन संवारने के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का कुशल संचालन संयोजक श्री विजय तिवारी ने किया। समापन पर श्री मदनगोपाल बाजपेई ने मुख्य अतिथि, संयोजक, सहसंयोजक, वक्ताओं और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री संजय शर्मा, मोहन प्रसाद तिवारी, शत्रुघ्न तिवारी, रमेश मौदेकर, डॉ. सौरभ शुक्ला, वैभव शर्मा, सचिन शुक्ला, मुकुंद द्विवेदी, भागवत पांडे सहित अनेक जनों ने योगदान दिया।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

