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नागपुर में न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर ने कहा, छात्रों का भविष्य गढ़ना ही असली शिक्षक का धर्म

नागपुर में न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर ने कहा, छात्रों का भविष्य गढ़ना ही असली शिक्षक का धर्म
Nagpur University Teachers Day: नागपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक दिवस समारोह में बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर ने कहा कि विद्यार्थियों के अनजाने में गुरु बनना ही सच्चे शिक्षक की पहचान है।

नागपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक दिवस समारोह में बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर ने कहा कि विद्यार्थियों के अनजाने में गुरु बनना ही सच्चे शिक्षक की पहचान है।

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Shinki Singh
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गुरु और शिक्षा की नई परिभाषा

शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से अंबाझरी मार्ग स्थित गुरुनानक भवन में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर ने शिक्षकों और छात्रों को संबोधित करते हुए एक बेहद अहम बात कही। उन्होंने दो टूक कहा कि विद्यार्थियों के अनजाने में उनका मार्गदर्शक और गुरु बन जाना ही एक सच्चे शिक्षक की असली पहचान है।

मार्गदर्शन करते हुए माननीय कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर
मार्गदर्शन करते हुए माननीय कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर

तकनीक के दौर में आत्ममंथन की जरूरत

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने कहा कि आज के तकनीकी युग में शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बढ़ती दूरी को पाटना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए नए डिग्री कोर्सेज, परीक्षा प्रणाली में सुधार और तकनीकी विकास की जानकारी दी। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति किलोर ने शिक्षकों को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि आज डिग्रियां होने के बावजूद कई बार ज्ञान का अभाव दिखता है, जिस पर विचार होना चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक का जिक्र करते हुए चेताया कि विद्यार्थी तकनीक से जानकारी जरूर ले रहे हैं, लेकिन उसकी सत्यता की जांच करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने न्यायालय में एआई से तैयार याचिकाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि इनमें अक्सर गलत संदर्भ सामने आते हैं।

उत्कृष्ट शिक्षकों और प्रतिभाओं का सम्मान

इस भव्य समारोह में विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. अखिलेश पेशवे और प्रभारी कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्राचार्यों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और लेखकों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, विश्वविद्यालय की अंतरमहाविद्यालयीन वार्षिकांक प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया, जिसमें हिस्लॉप कॉलेज की पत्रिका ‘द हिस्लॉपियन’ ने प्रथम स्थान हासिल किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. अमृता इंदूरकर ने किया और आभार प्रदर्शन प्रभारी कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ ने किया।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

एडिट: शिंकी सिंह

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शिंकी सिंह (Shinki Singh) पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग एक दशक का अनुभव रखती हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में दैनिक सन्मार्ग से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जहाँ कई वर्षों तक फील्ड रिपोर्टिंग और न्यूज़ डेस्क की जिम्मेदारियाँ निभाईं। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक सरोकारों, महिला मुद्दों और जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक रिपोर्टिंग की। इसके साथ ही न्यूज़ एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किया, जिससे डिजिटल और मल्टीमीडिया पत्रकारिता की उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई। इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर से जुड़कर हार्ड न्यूज़, समसामयिक घटनाओं और लाइफस्टाइल पत्रकारिता सहित विभिन्न विषयों पर रिपोर्टिंग और लेखन किया। तथ्यपरक, निष्पक्ष और संतुलित पत्रकारिता में विश्वास रखते हुए वे प्रत्येक समाचार को विश्वसनीय स्रोतों, तथ्यों के सत्यापन और गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देती हैं। वर्तमान में शिंकी सिंह राष्ट्र भारत से जुड़ी हैं, जहाँ वे राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक और जनहित से जुड़े विषयों पर समाचार, विश्लेषण और विशेष रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। शैक्षणिक रूप से उन्होंने महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक से बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास एवं अंग्रेज़ी विषयों में स्नातकोत्तर (Master's) की डिग्री हासिल की है। वे पत्रकारिता में निरंतर सीखने, बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को अपडेट रखने तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रकाशित करने में विश्वास रखती हैं।