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नागपुर में वंचित बहुजन आघाड़ी के नेताओं पर केस दर्ज, कार्यकर्ताओं को धमकाने का आरोप

नागपुर में वंचित बहुजन आघाड़ी के नेताओं पर केस दर्ज, कार्यकर्ताओं को धमकाने का आरोप
नागपुर में वंचित बहुजन आघाड़ी के नेताओं पर केस दर्ज, कार्यकर्ताओं को धमकाने का आरोप (File Photo)

नागपुर में वंचित बहुजन आघाड़ी के नेताओं पर कार्यकर्ताओं को धमकाने और गाली-गलौज करने का मामला दर्ज हुआ है। चुनावी अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल विवाद में बदल गए। घटना के बाद संगठन के भीतर तनाव बढ़ गया है। आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होगी, इस पर नजर बनी हुई है।

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Dipali Kumari
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VBA leaders controversy: महाराष्ट्र के नागपुर में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के भीतर विवाद गहराता नजर आ रहा है। संगठन के जिला और शहर स्तर के पदाधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रहे असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।

गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप

जानकारी के अनुसार, वंचित बहुजन आघाड़ी के जिला अध्यक्ष अजय सहारे, शहर अध्यक्ष मंगेश वानखेडे, महासचिव राहुल दहिकर और शुभम वाहाने के खिलाफ कार्यकर्ताओं को गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। यह घटना एक प्रशिक्षण शिविर के दौरान हुई, जहां पार्टी के कार्यकर्ता आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की तैयारी के लिए जुटे थे।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि हाल ही में हुए नागपुर महानगरपालिका, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में कथित अनियमितताओं को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। वे लगातार पार्टी नेतृत्व से जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसी मुद्दे को लेकर जब शिविर में चर्चा शुरू हुई, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शिविर शुरू होने से पहले ही कुछ कार्यकर्ताओं ने जिला प्रभारी कुशल मेश्राम के सामने चुनावी गड़बड़ियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इसी दौरान आरोप है कि संबंधित पदाधिकारियों ने सवाल पूछने वाले कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और विवाद बढ़ गया।

कार्यकर्ताओं  के साथ मारपीट

मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि चारों नेताओं ने कार्यकर्ताओं को डराने के लिए हथियारों का भय दिखाया और मारपीट करने की कोशिश की। इसके बाद कुछ कार्यकर्ताओं को जबरन बाहर निकालने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना से वहां मौजूद लोगों में डर और आक्रोश का माहौल बन गया।

घटना के बाद मनीष बोरकर की शिकायत पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।