Nitin Gadkari students speech: वक्तृत्व से व्यक्तित्व, नितिन गडकरी का विद्यार्थियों को गुरुमंत्र

Nitin Gadkari students speech: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर के डीपीएस स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद किया वक्तृत्व कला और व्यक्तित्व निर्माण पर साझा किए अनुभव।
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जब शिक्षक की डांट बनी ‘टर्निंग पॉइंट’: नितिन गडकरी
Nitin Gadkari students speech: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि वक्तृत्व केवल एक तकनीकी विषय नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कौशल है जिसे निरंतर अध्ययन अनुभव और व्यापक पठन-पाठन के जरिए विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली वक्तृत्व व्यक्ति के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।
शिक्षक की डांट ने बदल दी नितिन गडकरी की जिंदगी की दिशा
डीपीएस स्कूल, लावा द्वारा आयोजित ‘अदालत’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद गडकरी ने विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए अपने छात्र जीवन का एक प्रेरणादायक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत की आजादी के 25 साल पूरे होने के मौके पर उनके स्कूल में कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गई थीं, जिनमें एक वक्तृत्व प्रतियोगिता भी थी। इस दौरान एक छात्र भाषण देते समय अटक गया था जिस पर उन्होंने और उनके साथियों ने उसका मजाक उड़ाया। इस पर शिक्षक ने उन्हें डांटते हुए कहा था, “कम से कम उसने मंच पर जाकर बोलने का साहस तो दिखाया जबकि तुममें वह भी नहीं है।
जीवन में मिलने वाले हर मौके का पूरा फायदा लें
गडकरी ने बताया कि शिक्षक की इस सीख ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वे वक्तृत्व प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे और आगे चलकर विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक भी हासिल किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अगर उस दिन शिक्षक ने उन्हें न डांटा होता तो शायद उनका वक्तृत्व कौशल कभी विकसित ही नहीं हो पाता। इसलिए जीवन में मिलने वाले हर मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता और हर इंसान जीवनभर विद्यार्थी ही रहता है। संवाद, वाद-विवाद और वक्तृत्व एक ऐसी कला है जिसे लगातार अभ्यास से निखारा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि भाषण देते समय दूसरों की कविताओं या शेर-ओ-शायरी पर निर्भर रहने के बजाय अपने विचार सरल, प्रभावी और कम शब्दों में खुद प्रस्तुत करने की कोशिश करें।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

