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Nagpur News: मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन कानून को वापस लेने की मांग तेज

Nagpur News: मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन कानून को वापस लेने की मांग तेज
VHP demands cancel Temple Inam Land Law: मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन कानून को वापस लेने की मांग तेज (Photo: RB / Jassi)

VHP demands cancel Temple Inam Land Law: महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन कानून का विश्व हिंदू परिषद और विभिन्न देवस्थान ट्रस्टों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे मंदिरों की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। संगठनों ने कानून वापस लेने, मंदिर भूमि से अतिक्रमण हटाने और विशेषज्ञ समिति बनाकर नया विधेयक तैयार करने की मांग की है।

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Asfi Shadab
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मंदिरों की भूमि को लेकर बढ़ी चिंता

VHP demands cancel Temple Inam Land Law: नागपुर, 1 जून 2026। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राज्य के विभिन्न देवस्थान ट्रस्टों ने महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित “मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन कानून” को राज्य के हजारों प्राचीन मंदिरों और देवस्थानों के हितों पर गंभीर आघात बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।

नागपुर में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के महाराष्ट्र-गोवा मठ-मंदिर संपर्क प्रमुख अनिल सांबरे ने कहा कि मंदिरों को सदियों पूर्व पूजा-अर्चना, धार्मिक परंपराओं, अन्नदान, धर्मशालाओं, वेदपाठशालाओं और सामाजिक कार्यों के संचालन के लिए इनामी भूमि प्रदान की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि हिंदू समाज की आस्था और धार्मिक व्यवस्था का आधार है।

कानून वापस लेने की मांग पर संगठनों का जोर

संगठन की चेतावनी है कि इस प्रस्तावित कानून से मंदिरों की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी और अनेक धार्मिक व सामाजिक गतिविधियां बंद होने का खतरा उत्पन्न होगा।

विहिप की प्रमुख मांगें:

  • मंदिर भूमि पर हुए सभी अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं और भूमि पुनः देवस्थानों को हस्तांतरित की जाए।
  • धर्माचार्यों, मंदिर प्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों, राजस्व विशेषज्ञों एवं सामाजिक संगठनों को मिलाकर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।
  • यह समिति व्यापक अध्ययन के बाद मंदिर भूमि के संरक्षण, प्रबंधन और संवर्धन के लिए नया विधेयक तैयार करे।

इस अवसर पर वासुदेवराव नागपुरे, एडवोकेट रमण सेनाड और निरंजन रिसालदार भी उपस्थित रहे।

अब सभी की निगाहें महाराष्ट्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वह इस कानून पर पुनर्विचार करती है या नहीं।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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