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उत्तर प्रदेश की विसंगतियों के बीच अयोध्या चमकी, संभल में सख्त पहरा

उत्तर प्रदेश की विसंगतियों के बीच अयोध्या चमकी, संभल में सख्त पहरा
Ayodhya News: अयोध्या में ध्वजारोहण से पहले दीपोत्सव, संभल में कड़ी निगरानी (File Photo)

उत्तर प्रदेश में एक ओर संभल में हिंसा की पहली बरसी पर कड़ा पहरा है, तो दूसरी ओर अयोध्या ध्वजारोहण पूर्व दीपोत्सव की चमक में नहाने को तैयार है। सुरक्षा, सांस्कृतिक उत्साह, राजनीतिक उपस्थिति और इतिहास के नए संवाद के बीच राज्य विविध रूपों में सक्रिय दिखाई दे रहा है।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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उत्तर प्रदेश की विसंगतियों के बीच अयोध्या चमकी, संभल में सख्त पहरा

उत्तर प्रदेश में आज का दिन दो परस्पर विरोधी स्थितियों का साक्षी बन रहा है। एक ओर रामनगरी अयोध्या दीपों की रोशनी में नहाने को तैयार है, जहां भव्य ध्वजारोहण समारोह की पूर्व संध्या पर दीपोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। दूसरी ओर संभल जिले में सुरक्षा के साये में दिन गुजर रहा है, जहां 24 नवंबर 2024 की हिंसक घटना की बरसी पर प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी बढ़ा दी है। यह दृश्य उत्तर प्रदेश की जटिल सामाजिक स्थिति, धार्मिक उत्साह और सुरक्षा सतर्कता को एक साथ प्रतिबिंबित करता है।

संभल: हिंसा की बरसी पर कड़ी सुरक्षा

संभल जिले में पिछले वर्ष की हिंसा की दर्दनाक स्मृति आज भी ताजी है। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद में सर्वेक्षण के लिए पहुंची एक टीम पर भीड़ द्वारा किए गए पथराव ने शहर की शांति को झकझोर दिया था। हिंसा ने इतनी भयावहता धारण कर ली थी कि चार लोगों की जान चली गई और पूरा शहर दहशत में डूब गया था।

आज उस घटना को एक वर्ष पूरा होने पर प्रशासन ने पूरे शहर को संवेदनशील घोषित कर दिया है। पुलिस बल, पैदल गश्त, सीसीटीवी निगरानी और खुफिया विभाग की लगातार चौकसी के साथ न केवल भीड़ नियंत्रण बल्कि किसी भी उकसावे की आशंका को भांपने का प्रयास किया जा रहा है।

पथराव से जेल तक: आरोपी और कार्रवाई

हिंसा की घटना के बाद पुलिस ने 12 मुकदमे दर्ज किए और अब तक 133 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। लगातार की गई कार्रवाइयों का असर यह रहा कि शहर के बाजार, धार्मिक स्थल और आवागमन सामान्य रूप से चलने लगे हैं। त्योहारों और जुमे की नमाज के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती अब स्थापित प्रोटोकॉल बन चुकी है, जिससे प्रशासन यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अयोध्या: दीपों की रोशनी में धर्म ध्वज की तैयारी

संभल की सन्नाटे भरी सुरक्षा के उलट, रामनगरी अयोध्या उत्सव की चमक से भरी हुई है। 25 नवंबर को 191 फीट ऊंचा धर्म ध्वज फहराया जाएगा, जो आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जा रहा है। इस ध्वजारोहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हजारों विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।

शहर के बाजार, घर, गलियां और मंदिरों को सजाने के लिए पांच दिनों से तैयारी चल रही है। व्यापारी संघों ने दुकानों पर सजावट की विशेष योजना तैयार की है, ताकि आगंतुकों और श्रद्धालुओं को दिवाली से भी भव्य दृश्य दिखाई दे।

दीपोत्सव अपने नए स्वरूप में

दीप जलाने की परंपरा इस बार एक विशिष्ट क्षण पर केन्द्रित हो रही है। ध्वजारोहण की पूर्व संध्या पर पूरे शहर में दीप और मोमबत्तियां जलाने का आह्वान किया गया है। अयोध्या के लोग इसे प्राण-प्रतिष्ठा जैसी ऐतिहासिक घटना से जोड़ते हुए मनाने की तैयारी कर रहे हैं। रोशनी की चादर में लिपटी रामनगरी अपने पुनर्उद्भव का साक्ष्य प्रस्तुत कर रही है।

कौन होंगे अतिथि: विवाद से संवाद की दिशा में

ध्वजारोहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के अलावा दो अतिथियों को विशेष रूप से चर्चा में शामिल किया जा रहा है। बाबरी मस्जिद विवाद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी और तीन दशक पहले गठित इस्लामीकरण विरोधी सेना के तत्कालीन कमांडर डॉ. मृदुल शुक्ल को आमंत्रण भेजा गया है। इन दोनों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि विश्वास और विरोध के माध्यम से गुजरा इतिहास अब संवाद और स्वीकृति में बदलने की कोशिश कर रहा है।

संभल में कश्मीरी श्रमिकों की स्क्रीनिंग

दिल्ली ब्लास्ट के बाद संभल में कश्मीर से आए सुरक्षा गार्डों और मजदूरों की खोज जारी है। सत्यापन के बाद 13 लोगों को वापस भेजा जा चुका है, वहीं 25 अन्य को भेजने की तैयारी है। हयातनगर की मस्जिद में कार्यरत एक कश्मीरी इमाम पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। यह प्रक्रिया स्थानीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ-साथ बाहरी व्यक्तियों को उचित पुष्टि के तहत ही काम करने देने का उद्देश्य रखती है।

दवाओं की कालाबाजारी: मरीजों के साथ खिलवाड़

अयोध्या और संभल की खबरों के बीच एक गंभीर चिकित्सीय अपराध का खुलासा भी हुआ है। कैंसर रोगियों के लिए एक्सपायर हो चुके इंजेक्शन को री-लेबल कर बाजार में बेचने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया गया है। मात्र तीन हजार रुपये में मुहर हटाकर, पुनः कीमत डालकर इन दवाओं को मरीजों को बेचा जा रहा था। यह मामला स्वास्थ्य सेवा तंत्र में जड़ जमाए भ्रष्टाचार और मानवता विरोधी अपराध की भयावहता को सामने लाता है।

सपा सांसद अवधेश प्रसाद की भावनात्मक प्रतिक्रिया

अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने स्वयं ध्वजारोहण में सम्मिलित होने की घोषणा करते हुए कहा कि स्थानीय सांसद होने के नाते यह उनका कर्तव्य और सौभाग्य दोनों है। उन्होंने कहा कि वह सारा कामधंधा छोड़कर नंगे पैर इस आयोजन में शामिल होंगे। यह कथन व्यक्तिगत धार्मिक भाव, सांस्कृतिक गर्व और राजनीतिक विनम्रता का मिश्रित स्वरूप प्रतीत होता है।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।