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Chhath Puja: छठ पूजा भारत की प्राचीन विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Chhath Puja: छठ पूजा भारत की प्राचीन विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
Chhath Puja: योगी आदित्यनाथ इसे भारत की प्राचीन विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हैं | छठ पूजा पर बोले योगी आदित्यनाथ (Photo: PTI)
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Aryan Ambastha
Aryan Ambastha
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योगी आदित्यनाथ बोले — “छठ पूजा केवल पर्व नहीं, सामाजिक एकता का प्रतीक है”

लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान स्थित छठ घाट पर आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन विरासत, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि यह त्योहार हमारी सनातन संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है, जहां लोग अपने समाज, परिवार और प्रकृति से गहराई से जुड़ते हैं।


भोजपुरी में दी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को भोजपुरी भाषा में संबोधित करते हुए छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा —

“ई पर्व के मर्म समाज के एकता में छिपल बा। छठ पूजा ना केवल नदी-घाट के आयोजन ह, बल्कि आत्मा के शुद्धि आ संस्कार के प्रतीक ह।”

उनके इस संबोधन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ स्वागत किया।


कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि उपस्थित

छठ पूजा के इस भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने घाट पर पहुँचकर सूर्य देवता को नमन किया और श्रद्धालुओं से मुलाकात की।

कार्यक्रम में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे।


“छठ दुनिया में अनोखा पर्व है” — योगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि छठ पूजा जैसा पर्व दुनिया के किसी भी देश में देखने को नहीं मिलता। यह पर्व समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है और महिलाओं की श्रद्धा, संयम और शक्ति का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के हर जिले में छठ पर्व के आयोजन को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है।


आध्यात्मिकता और पर्यावरण का संगम

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि छठ पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और आध्यात्मिकता के संगम का उत्सव है। इसमें प्रकृति, सूर्य और जल की पूजा कर मानव जीवन में संतुलन और सकारात्मकता का संदेश दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत की यह प्राचीन परंपरा विश्व को “प्रकृति से जुड़ने का मार्ग” सिखाती है।


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