West Bengal Police 38 Second App: अब सिर्फ 38 सेकंड में होगी अपराधियों की पहचान, राज्य पुलिस का नया फिंगरप्रिंट ऐप

West Bengal Police 38 Second App: राज्य पुलिस लॉन्च करेगी नया मोबाइल ऐप। फिंगरप्रिंट से सिर्फ 38 सेकंड में होगी अपराधियों की पहचान जानें कैसे करेगा काम।
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हर पुलिसकर्मी के मोबाइल में होगा ऐप, थानों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
West Bengal Police 38 Second App: पश्चिम बंगाल में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए राज्य पुलिस प्रशासन एक बड़ा तकनीकी कदम उठाने जा रहा है। अब सड़क पर गश्त या नाका चेकिंग के दौरान किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि जांचने में पुलिस को मात्र 38 सेकंड का समय लगेगा। इसके लिए राज्य पुलिसकर्मियों के मोबाइल में एक विशेष पोर्टेबल फिंगरप्रिंट ऐप रोलआउट किया जा रहा है।
कैसे काम करेगी यह आधुनिक प्रणाली
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तत्काल फिंगरप्रिंट स्कैनिंग: गश्त के दौरान संदेह होने पर पुलिसकर्मी मौके पर ही संबंधित व्यक्ति का फिंगरप्रिंट अपने मोबाइल में डाउनलोड ऐप के जरिए स्कैन कर सकेंगे।
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NAFIS डेटाबेस से सीधा संपर्क: स्कैन किया गया फिंगरप्रिंट तुरंत ‘नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (NAFIS) के राष्ट्रीय सर्वर पर भेजा जाएगा। इस सर्वर में देश भर के लगभग 1.5 करोड़ अपराधियों और कैदियों का बायोमेट्रिक डेटा मौजूद है।
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38 सेकंड में परिणाम: महज 38 सेकंड के भीतर ऐप यह स्पष्ट कर देगा कि उस व्यक्ति के खिलाफ देश के किसी भी हिस्से में कोई आपराधिक मामला दर्ज है या वह पहले कभी गिरफ्तार हुआ है या नहीं।
फर्जी नाम और पहचान बदलने की चालाकी होगी नाकाम
अक्सर देखा गया है कि शातिर अपराधी पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार अपने नाम, पते और पहचान पत्र बदलते रहते हैं। कई बार जांच अधिकारियों को आरोपियों के घर जाने पर भी भ्रामक जानकारी का सामना करना पड़ता है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से फर्जी दस्तावेजों के सहारे घूमने वाले अपराधियों की चालाकी अब काम नहीं आएगी। बायोमेट्रिक मिलान के कारण अपराधी की असली पहचान तुरंत उजागर हो जाएगी और उसे मौके पर ही गिरफ्तार किया जा सकेगा।
प्रत्येक पुलिसकर्मी के मोबाइल में होगा ऐप, दी जाएगी ट्रेनिंग
राज्य के प्रत्येक थानों और फाड़ियों में तैनात पुलिसकर्मियों के मोबाइल में इस ऐप को इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया गया है। तकनीक के कुशल संचालन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के ‘मेजरमेंट कलेक्शन पोर्टल’ से पूरी तरह जुड़ रही है। इसके तहत राज्य में गिरफ्तार होने वाले हर नए अपराधी का बायोमेट्रिक डेटा तुरंत इस पोर्टल पर अपलोड कर राष्ट्रीय डेटाबेस में शामिल कर दिया जाएगा।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

