मालदा की सुदीप्ता मंडल ने टूटे पैर के बाद राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप में बंगाल को दिलाया खिताब

मालदा की सुदीप्ता मंडल अंडर-16 राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियन: मालदा के हरिश्चंद्रपुर की सुदीप्ता मंडल ने पैर टूटने के बाद फुटबॉल मैदान पर वापसी की। अनंतपुर में राष्ट्रीय चैंपियनशिप के फाइनल में उसने पेनाल्टी पर गोल कर बंगाल की जीत में योगदान दिया। पश्चिम बंगाल ने मणिपुर को 3-2 से हराकर 14 साल बाद खिताब जीता। सुदीप्ता अब भारतीय टीम की जर्सी पहनने का सपना देख रही है।
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चोट से लौटकर राष्ट्रीय चैंपियन बनी सुदीप्ता का सपना
मालदा की सुदीप्ता मंडल अंडर-16 राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियन: मालदा: हरिश्चंद्रपुर के तेंतुलबाड़ी की बेटी सुदीप्ता मंडल ने अंडर-16 महिला राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप के फाइनल में पेनाल्टी पर गोल कर बंगाल को चैंपियन बनाया। एक साल पहले फुटबॉल खेलते समय उनका पैर टूट गया था और वे लंबे समय तक मैदान से बाहर रही थीं।
शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में डॉक्टर तालिमेरेन आउ जूनियर गर्ल्स नेशनल फुटबॉल चैंपियनशिप का फाइनल खेला गया। इसमें पश्चिम बंगाल ने मणिपुर को पेनाल्टी शूटआउट में 3-2 से हराया। पेनाल्टी में गोल कर सुदीप्ता ने जीत में अहम भूमिका निभाई। बंगाल ने 14 साल बाद राष्ट्रीय खिताब जीता है।
बुधवार को घर लौटने पर सुदीप्ता का भव्य स्वागत हुआ। हरिश्चंद्रपुर फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अमिनुल हक और स्थानीय लोगों ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता और माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्हें एक फुटबॉल भी भेंट की गई। उनकी सफलता से इलाके की किशोरियों में फुटबॉल खेलने की नई रुचि जगी है।


पेनाल्टी में गोल कर बंगाल की जीत में निभाई अहम भूमिका
सुदीप्ता रायगंज हातिया हाई स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने सात साल की उम्र में फुटबॉल शुरू किया था। उनके पिता सुबीर मंडल ही उनके पहले कोच हैं। मां देबश्री दास गृहिणी हैं। पैर टूटने के बाद भी सुदीप्ता ने अभ्यास नहीं छोड़ा और धीरे-धीरे मैदान में वापसी कर अपनी जगह फिर बनाई।
ब्राजील के स्टार नेमार सुदीप्ता के पसंदीदा फुटबॉलर हैं और उन्हें उनका खेल देखना पसंद है। सुदीप्ता का सपना साफ है: एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश के लिए खेलना।
पिता सुबीर मंडल ने कहा, “पैर टूटने के बाद भी बेटी ने फुटबॉल नहीं छोड़ा। बहुत मेहनत करके वह फिर मैदान में लौटी है। उसकी सफलता से हम बहुत गर्वित हैं।”
अमिनुल हक ने कहा, “सुदीप्ता की लड़ाई दूसरी लड़कियों को भी हिम्मत देगी। उसे देखकर और लड़कियां फुटबॉल में आएंगी, यही हमारी उम्मीद है।”
चोट सुदीप्ता को रोक नहीं सकी। उसी चोट को पार कर वह अब अपने नए सपने, भारत की जर्सी, की ओर बढ़ रही है।


रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

