
PM Modi Meeting: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति पर पड़ रहे असर को लेकर भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री Narendra Modi आज रविवार शाम वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक का मकसद साफ है कि देश में जरूरी संसाधनों की सप्लाई को किसी भी हाल में प्रभावित न होने देना और आम जनता पर इसका असर कम से कम रखना। इन मुद्दों पर होगी खास चर्चा सूत्रों के अनुसार, इस अहम बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, बिजली और खाद जैसे चार प्रमुख

PM Modi Meeting: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति पर पड़ रहे असर को लेकर भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री Narendra Modi आज रविवार शाम वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक का मकसद साफ है कि देश में जरूरी संसाधनों की सप्लाई को किसी भी हाल में प्रभावित न होने देना और आम जनता पर इसका असर कम से कम रखना। इन मुद्दों पर होगी खास चर्चा सूत्रों के अनुसार, इस अहम बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, बिजली और खाद जैसे चार प्रमुख

घिर गया ईरान, 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं India trapped in war: पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में तनाव ने खुली जंग का रूप ले लिया है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े सैन्य अभियान शुरू किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे ‘एपिक फ्यूरी’ ऑपरेशन कहा, जबकि इजराइल ने अपने हमले का नाम ‘शील्ड ऑफ जूडा’ रखा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने लगभग 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों और शहरों में भय और अनिश्चितता फैल गई है। वहीं दूसरी ओर ईरान सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को लेकर अब विरोधाभासी

घिर गया ईरान, 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं India trapped in war: पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में तनाव ने खुली जंग का रूप ले लिया है। अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े सैन्य अभियान शुरू किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे ‘एपिक फ्यूरी’ ऑपरेशन कहा, जबकि इजराइल ने अपने हमले का नाम ‘शील्ड ऑफ जूडा’ रखा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने लगभग 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों और शहरों में भय और अनिश्चितता फैल गई है। वहीं दूसरी ओर ईरान सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को लेकर अब विरोधाभासी

नागपुर के प्रसिद्ध भोंसला मिलिट्री स्कूल में 30 दिसंबर 2025 को एक खास मौका आया जब इजरायल के महावाणिज्यदूत ने यहां दौरा किया। मुंबई स्थित मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत श्री यानिव रेवाच ने इस ऐतिहासिक शिक्षा संस्थान का भ्रमण किया और यहां के सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्था को देखकर काफी प्रभावित हुए। उनके साथ इजरायल के महावाणिज्यदूत कार्यालय के श्री अनाय जोगलेकर भी मौजूद थे। कैडेटों द्वारा शानदार गार्ड ऑफ ऑनर महावाणिज्यदूत के स्वागत का तरीका ही कुछ खास था। स्कूल के होनहार कैडेटों ने एक शानदार गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया जिसने सभी को प्रभावित कर दिया। सैन्य

नागपुर के प्रसिद्ध भोंसला मिलिट्री स्कूल में 30 दिसंबर 2025 को एक खास मौका आया जब इजरायल के महावाणिज्यदूत ने यहां दौरा किया। मुंबई स्थित मध्य-पश्चिम भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत श्री यानिव रेवाच ने इस ऐतिहासिक शिक्षा संस्थान का भ्रमण किया और यहां के सैन्य प्रशिक्षण व्यवस्था को देखकर काफी प्रभावित हुए। उनके साथ इजरायल के महावाणिज्यदूत कार्यालय के श्री अनाय जोगलेकर भी मौजूद थे। कैडेटों द्वारा शानदार गार्ड ऑफ ऑनर महावाणिज्यदूत के स्वागत का तरीका ही कुछ खास था। स्कूल के होनहार कैडेटों ने एक शानदार गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया जिसने सभी को प्रभावित कर दिया। सैन्य

गाजा पट्टी में जारी सैन्य अभियानों के बीच इजरायल को एक बड़ी और भावनात्मक सफलता मिली है। इजरायली सेना ने उन सुरंगों में 2014 से लापता अपने सैनिक के अवशेष बरामद किए हैं जिन्हें हमास ने वर्षों से छिपाकर रखा था। यह खोज न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इजरायल के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान और शोक का प्रतीक भी है। इस अभियान ने गाजा के नीचे मौजूद उस भयावह सुरंग नेटवर्क का भी खुलासा किया है, जिसे लंबे समय से हमास अपनी रणनीति के लिए उपयोग कर रहा था। गाजा के नीचे छिपा विशाल सुरंग नेटवर्क इजरायली सेना

गाजा पट्टी में जारी सैन्य अभियानों के बीच इजरायल को एक बड़ी और भावनात्मक सफलता मिली है। इजरायली सेना ने उन सुरंगों में 2014 से लापता अपने सैनिक के अवशेष बरामद किए हैं जिन्हें हमास ने वर्षों से छिपाकर रखा था। यह खोज न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इजरायल के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान और शोक का प्रतीक भी है। इस अभियान ने गाजा के नीचे मौजूद उस भयावह सुरंग नेटवर्क का भी खुलासा किया है, जिसे लंबे समय से हमास अपनी रणनीति के लिए उपयोग कर रहा था। गाजा के नीचे छिपा विशाल सुरंग नेटवर्क इजरायली सेना

इस्राइल-गाज़ा संघर्षविराम में शवों का आदान-प्रदान, 30 फिलिस्तीनी शव लौटाए गए गाज़ा पट्टी में जारी मानवीय संकट और इस्राइल-हमास संघर्षविराम के बीच शुक्रवार को एक संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया। अस्पताल अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने पुष्टि की है कि इस्राइल ने 30 फिलिस्तीनी नागरिकों के शव गाज़ा को सौंपे हैं। यह सौंपे गए शव अब तक पहचाने नहीं जा सके हैं, और गाज़ा के नासेर अस्पताल में रखे गए हैं। नासेर अस्पताल में शवों की पहचान की चुनौती दक्षिणी गाज़ा के खान युनिस शहर स्थित नासेर अस्पताल के बाल रोग विभाग प्रमुख अहमद अल-फ़र्रा ने बताया कि इस्राइल

इस्राइल-गाज़ा संघर्षविराम में शवों का आदान-प्रदान, 30 फिलिस्तीनी शव लौटाए गए गाज़ा पट्टी में जारी मानवीय संकट और इस्राइल-हमास संघर्षविराम के बीच शुक्रवार को एक संवेदनशील घटनाक्रम सामने आया। अस्पताल अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने पुष्टि की है कि इस्राइल ने 30 फिलिस्तीनी नागरिकों के शव गाज़ा को सौंपे हैं। यह सौंपे गए शव अब तक पहचाने नहीं जा सके हैं, और गाज़ा के नासेर अस्पताल में रखे गए हैं। नासेर अस्पताल में शवों की पहचान की चुनौती दक्षिणी गाज़ा के खान युनिस शहर स्थित नासेर अस्पताल के बाल रोग विभाग प्रमुख अहमद अल-फ़र्रा ने बताया कि इस्राइल

संघर्षविराम के बीच शवों की अदला-बदली इज़राइल और हमास के बीच चल रहे नाज़ुक संघर्षविराम के दौरान एक मानवीय पहल के तहत इज़राइल ने गाज़ा प्रशासन को 30 फ़िलिस्तीनी नागरिकों के शव लौटाए हैं। गाज़ा के अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि इन शवों को गुरुवार देर रात रफ़ा सीमा चौकी के माध्यम से सौंपा गया। यह कदम उस घटना के बाद आया है जब फ़िलिस्तीनी उग्रवादियों ने दो इज़राइली बंधकों के अवशेष इज़राइल को लौटाए थे। इस तरह की अदला-बदली दोनों पक्षों के बीच चल रही मानवीय वार्ताओं की एक संवेदनशील कड़ी मानी जा रही है। जबकि ज़मीनी स्थिति अभी

संघर्षविराम के बीच शवों की अदला-बदली इज़राइल और हमास के बीच चल रहे नाज़ुक संघर्षविराम के दौरान एक मानवीय पहल के तहत इज़राइल ने गाज़ा प्रशासन को 30 फ़िलिस्तीनी नागरिकों के शव लौटाए हैं। गाज़ा के अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि इन शवों को गुरुवार देर रात रफ़ा सीमा चौकी के माध्यम से सौंपा गया। यह कदम उस घटना के बाद आया है जब फ़िलिस्तीनी उग्रवादियों ने दो इज़राइली बंधकों के अवशेष इज़राइल को लौटाए थे। इस तरह की अदला-बदली दोनों पक्षों के बीच चल रही मानवीय वार्ताओं की एक संवेदनशील कड़ी मानी जा रही है। जबकि ज़मीनी स्थिति अभी

हमास की बड़ी गलती और इजरायल की प्रतिक्रिया इजरायली सेना ने बुधवार को घोषणा की कि हमास द्वारा युद्धविराम समझौते के तहत लौटाए गए चार शवों में से एक शव किसी भी बंधक का नहीं था। सेना के अनुसार, रातभर चले फोरेंसिक परीक्षण में पाया गया कि शव किसी भी ज्ञात बंधक से मेल नहीं खाता। इस घोषणा के बाद इजरायल ने हमास को कड़ी चेतावनी दी कि सभी मृत बंधकों को तुरंत लौटाना होगा। हमास ने अब तक कुल 20 जीवित बंधकों और 8 शवों को लौटाया है, जिनमें 6 इजरायली, 1 नेपाली और 1 अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।

हमास की बड़ी गलती और इजरायल की प्रतिक्रिया इजरायली सेना ने बुधवार को घोषणा की कि हमास द्वारा युद्धविराम समझौते के तहत लौटाए गए चार शवों में से एक शव किसी भी बंधक का नहीं था। सेना के अनुसार, रातभर चले फोरेंसिक परीक्षण में पाया गया कि शव किसी भी ज्ञात बंधक से मेल नहीं खाता। इस घोषणा के बाद इजरायल ने हमास को कड़ी चेतावनी दी कि सभी मृत बंधकों को तुरंत लौटाना होगा। हमास ने अब तक कुल 20 जीवित बंधकों और 8 शवों को लौटाया है, जिनमें 6 इजरायली, 1 नेपाली और 1 अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।

हमास ने सभी बंधकों को किया रिहा, ट्रंप बोले — “मिडिल ईस्ट में नया ऐतिहासिक सवेरा” यरुशलम में एक ऐतिहासिक दिन देखा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की संसद नेसेट में खड़े होकर घोषणा की कि “अंधकार और कैद के दो वर्षों के बाद 20 साहसी बंधक अपने परिवारों के पास लौट रहे हैं।”यह बयान सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि दो साल से जारी खूनी संघर्ष के अंत की प्रतीक बन गया। दो साल बाद थमा युद्ध का पहिया करीब दो वर्षों तक इजरायल और हमास के बीच चला भीषण युद्ध आखिरकार सीजफायर के साथ थम गया।

हमास ने सभी बंधकों को किया रिहा, ट्रंप बोले — “मिडिल ईस्ट में नया ऐतिहासिक सवेरा” यरुशलम में एक ऐतिहासिक दिन देखा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की संसद नेसेट में खड़े होकर घोषणा की कि “अंधकार और कैद के दो वर्षों के बाद 20 साहसी बंधक अपने परिवारों के पास लौट रहे हैं।”यह बयान सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि दो साल से जारी खूनी संघर्ष के अंत की प्रतीक बन गया। दो साल बाद थमा युद्ध का पहिया करीब दो वर्षों तक इजरायल और हमास के बीच चला भीषण युद्ध आखिरकार सीजफायर के साथ थम गया।