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370 रुपये बिरयानी विवाद पर बोले मुनव्वर फारुकी, कहा- हर चीज की एक सीमा होती है

370 रुपये बिरयानी विवाद पर बोले मुनव्वर फारुकी, कहा- हर चीज की एक सीमा होती है
370 रुपये बिरयानी विवाद पर बोले मुनव्वर फारुकी, कहा- हर चीज की एक सीमा होती है (Pic Credit- IG @bolly_newssss)

370 रुपये बिरयानी विवाद को लेकर जारी बहस के बीच कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि गलती की आलोचना जरूरी है, लेकिन उसकी भी एक सीमा होनी चाहिए। मुनव्वर ने लोगों से सोशल मीडिया पर लगातार हो रहे हमलों को रोकने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की।

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Dipali Kumari
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Munawar Faruqui: स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे से जुड़े 370 रुपये बिरयानी विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर बहस लगातार जारी है। इस मामले ने पिछले कुछ दिनों में काफी सुर्खियां बटोरी हैं और विवाद बढ़ने के बाद प्रणीत मोरे सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग चुके हैं। अब इस पूरे विवाद पर कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने लोगों से संयम बरतने और मामले को अनावश्यक रूप से आगे न बढ़ाने की अपील की है।

आलोचना की भी एक सीमा होनी चाहिए- मुनव्वर

मुनव्वर फारुकी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जिस घटना को लेकर विवाद हुआ, उसमें कुछ बातें निश्चित रूप से गलत थीं और लोगों को उन पर आपत्ति जताने का पूरा अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी गलती की आलोचना जरूरी है, लेकिन आलोचना की भी एक सीमा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, इस मामले से जुड़े लोगों को पहले ही काफी नुकसान झेलना पड़ा है और अब लगातार उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

मुनव्वर ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही तीखी प्रतिक्रियाओं और लगातार हो रहे हमलों को रोकने की जरूरत है। उनका मानना है कि अगर किसी मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो उसे संबंधित एजेंसियों और कानून पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया ट्रायल से बचें और स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण न बनाएं।

 

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क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, यह विवाद एक स्टैंड-अप शो की वायरल क्लिप के बाद शुरू हुआ था। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और दर्शकों की एक टिप्पणी को लेकर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक मानसिकता से जोड़कर देखा, जिसके बाद विरोध तेज हो गया। देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया से निकलकर कानूनी स्तर तक पहुंच गया।

विवाद बढ़ने के बाद प्रणीत मोरे और कार्यक्रम से जुड़े अन्य लोगों को भी भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। बढ़ते दबाव के बीच संबंधित पक्षों ने सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया और माफी मांगी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस थमती नजर नहीं आई।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।