Rashtra Bharat Logo

अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, सरकार ने सख्त किए नियम

अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, सरकार ने सख्त किए नियम
अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कफ सिरप, सरकार ने सख्त किए नियम

केंद्र सरकार ने कफ सिरप समेत सभी प्रकार की सिरप दवाओं की बिक्री के नियम सख्त कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप खरीदना संभव नहीं होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय का यह फैसला दवाओं के सुरक्षित उपयोग और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

Updated:
·by
Dipali Kumari
Dipali Kumari
Share:

विषयसूची

Cough Syrup Rules Changed: देश में दवाओं की बिक्री और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक नई अधिसूचना जारी कर कफ सिरप समेत सभी प्रकार की सिरप दवाओं की बिक्री के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के लागू होने के बाद अब कोई भी व्यक्ति मेडिकल स्टोर से डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना सिरप नहीं खरीद सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम दवाओं के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने और आम लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

 ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन किया गया है। इसके तहत अनुसूची K (Schedule K) में शामिल दवाओं की सूची से “Syrups” शब्द को हटा दिया गया है। अब तक कई तरह की सिरप दवाएं ऐसी श्रेणी में आती थीं जिन्हें कुछ परिस्थितियों में बिना डॉक्टर की पर्ची के भी खरीदा जा सकता था। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद इनकी बिक्री पूरी तरह से नियमन के दायरे में आ जाएगी और डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें खरीदना संभव नहीं होगा।

क्यों लिया सरकार ने बड़ा फैसला ?

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में दूषित कफ सिरप के कारण कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई ऐसी घटनाओं ने दवा निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और बिक्री व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इन मामलों के बाद विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संगठनों ने सिरप दवाओं की बिक्री पर सख्त निगरानी और नियमों को और मजबूत करने की मांग की थी।

जानिए नोटिफिकेशन में क्या कहा गया ?

मंत्रालय ने बताया कि यह संशोधन 9 जून 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में सरकार ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी कर जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे। प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों की राय पर विचार करने के बाद अंतिम फैसला लिया गया।

नोटिफिकेशन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह संशोधन किया है। “ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026” नाम से लागू किए गए इस बदलाव को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी माना जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी, मरीजों को सही चिकित्सा सलाह मिल सकेगी और बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों की सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही मेडिकल स्टोर संचालकों को भी अब सिरप दवाओं की बिक्री के दौरान निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Dipali Kumari

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।