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अब FASTag और UPI से ही कटेगा टोल टैक्स, नहीं चलेगा कैश

अब FASTag और UPI से ही कटेगा टोल टैक्स, नहीं चलेगा कैश
आज से FASTag एनुअल पास हुआ महंगा, टोल प्लाजा पर अब नहीं चलेगा कैश, जानिए नए नियम

सरकार ने टोल टैक्स सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है। 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश लेन बंद हो जाएगी और भुगतान सिर्फ FASTag या UPI से होगा। इस कदम से जाम कम होगा और हाईवे सफर तेज, आसान और पारदर्शी बनेगा।

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Dipali Kumari
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FASTag: अगर आप हाईवे पर सफर करते हैं और आज भी टोल प्लाजा पर जेब से नकद पैसे निकालने के आदी हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने देशभर के टोल टैक्स सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला कर लिया है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में हाईवे पर कैश का कोई काम नहीं रहेगा। टोल भुगतान सिर्फ FASTag और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही किया जा सकेगा।

यह फैसला केवल भुगतान का तरीका बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए सरकार हाईवे यात्रा को तेज, पारदर्शी और जाम-मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।

1 अप्रैल से खत्म हो जाएगी कैश लेन

अब तक देश के ज्यादातर टोल प्लाजा पर कैश लेन की सुविधा उपलब्ध थी। जिन लोगों के पास FASTag नहीं होता था या जिनका टैग काम नहीं करता था, वे नकद भुगतान करके आगे बढ़ जाते थे। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1 अप्रैल से यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जा रही है।

सरकार का साफ कहना है कि अब हर वाहन को डिजिटल भुगतान के जरिए ही टोल पार करना होगा। कैश लेन को हटाने के बाद टोल प्लाजा पर सिर्फ FASTag और UPI आधारित भुगतान की सुविधा ही उपलब्ध रहेगी।

FASTag और UPI बनेंगे हाईवे का पास

नए नियम के तहत टोल टैक्स भरने के लिए केवल दो विकल्प होंगे—FASTag और UPI। FASTag पहले से ही निजी और व्यावसायिक वाहनों के लिए अनिवार्य किया जा चुका है, लेकिन अब UPI को भी एक मजबूत विकल्प के तौर पर आगे लाया जा रहा है।

UPI आधारित भुगतान उन यात्रियों के लिए मददगार होगा, जिनका FASTag किसी वजह से काम नहीं कर रहा या जिनके खाते में बैलेंस कम है। स्कैन करके तुरंत भुगतान किया जा सकेगा और वाहन बिना ज्यादा रुके आगे बढ़ सकेगा।

जाम और बहस से मिलेगी राहत

टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम का सबसे बड़ा कारण कैश भुगतान और उससे जुड़ी बहसें रही हैं। खुले पैसे न होना, रसीद को लेकर विवाद या भुगतान में देरी—ये सब जाम की वजह बनते हैं।

सरकार का दावा है कि डिजिटल टोल सिस्टम से गाड़ियां बिना रुके आगे बढ़ेंगी। FASTag अपने आप स्कैन होगा और टोल कट जाएगा। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

बैरियर-फ्री हाईवे की दिशा में कदम

यह फैसला सरकार के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसमें देशभर के हाईवे को बैरियर-फ्री बनाया जाना है। भविष्य में ऐसे हाईवे की कल्पना की जा रही है, जहां टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत ही न पड़े।

टोल कटौती पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से होगी और वाहन बिना किसी रुकावट के सफर तय करेंगे। इससे लंबी दूरी की यात्राएं आसान और तेज होंगी, खासकर ट्रक, बस और कमर्शियल वाहनों के लिए।

यात्रियों के लिए जरूरी चेतावनी

सरकार के इस फैसले के बाद हाईवे यात्रियों को अपनी तैयारी अभी से करनी होगी। अगर आपके वाहन में FASTag नहीं लगा है या वह एक्टिव नहीं है, तो तुरंत इसे दुरुस्त करा लें। साथ ही अपने मोबाइल में UPI ऐप एक्टिव रखें और बैंक खाते से लिंक जरूर करवा लें।

1 अप्रैल के बाद अगर आप सिर्फ कैश लेकर टोल प्लाजा पहुंचे, तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में वाहन को रोका भी जा सकता है या वैकल्पिक रास्ता अपनाने को कहा जा सकता है।

डिजिटल भारत की ओर एक और कदम

टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल करना ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को भी मजबूती देता है। इससे टोल कलेक्शन में पारदर्शिता आएगी, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी और सरकार को रियल-टाइम डेटा मिलेगा।

डिजिटल भुगतान से यह भी पता चल सकेगा कि किस हाईवे पर कितना ट्रैफिक है, किस समय ज्यादा दबाव रहता है और कहां इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की जरूरत है।

शुरुआती दिक्कतें, लेकिन लंबा फायदा

यह सच है कि बदलाव के शुरुआती दिनों में कुछ यात्रियों को दिक्कत हो सकती है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोग या बुजुर्ग, जो डिजिटल पेमेंट के आदी नहीं हैं। लेकिन सरकार और बैंकों की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग इस बदलाव को आसानी से अपना सकें।

लंबे समय में यह फैसला यात्रियों, सरकार और पर्यावरण—तीनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।