गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ की भागीदारी से खालिस्तानी संगठनों में बढ़ी बेचैनी

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि होंगे और EU का दस्ता कर्तव्य पथ पर मार्च करेगा। यह ऐतिहासिक भागीदारी खालिस्तानी संगठनों और पाकिस्तान की ISI को परेशान कर रही है। अगले दिन 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन होगा जिसमें व्यापार, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर चर्चा होगी।
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भारत का 77वां गणतंत्र दिवस समारोह इस बार कई मायनों में खास होने जा रहा है। इस राष्ट्रीय पर्व पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी न केवल भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है, बल्कि यह अलगाववादी ताकतों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक भागीदारी से खालिस्तानी संगठनों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI में बेचैनी बढ़ गई है।
यूरोपीय संघ के नेता बनेंगे मुख्य अतिथि
इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के इतने बड़े पदों पर बैठे नेता एक साथ भारत के राष्ट्रीय समारोह में हिस्सा ले रहे हैं। यह घटना भारत-यूरोप संबंधों में एक नया अध्याय खोलने जा रही है।
कर्तव्य पथ पर मार्च करेगा यूरोपीय संघ का दस्ता
गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय संघ का एक विशेष दस्ता भी शामिल होगा। कर्तव्य पथ पर होने वाली इस परेड में यूरोपीय संघ के चार ध्वजवाहक दो जिप्सी वाहनों पर सवार होकर मार्च पास्ट में हिस्सा लेंगे। यह दृश्य भारत और यूरोप के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग का जीवंत प्रमाण होगा। खुफिया सूत्रों का कहना है कि यह भागीदारी केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि यूरोप अब भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।
खालिस्तानी संगठनों की बढ़ती चिंता
यूरोपीय संघ की इस सक्रिय भागीदारी से खालिस्तानी संगठनों में खलबली मची हुई है। सालों से ये संगठन यूरोपीय देशों में अपनी गतिविधियां चलाते रहे हैं और वहां से अपने अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देते रहे हैं। लेकिन अब यूरोपीय देश इन संगठनों के असली चेहरे को समझने लगे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, भारत ने यूरोपीय देशों को यह जानकारी दी है कि कई तथाकथित खालिस्तानी संगठन हिंसक आतंकी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
यूरोप की बदलती सोच
यूरोपीय देशों की सोच में आया यह बदलाव खालिस्तानी संगठनों के लिए बड़ा झटका है। अब यूरोपीय संघ इन समूहों को अपनी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा मानने लगा है। पहले जहां ये संगठन यूरोपीय देशों में खुलकर अपनी गतिविधियां चलाते थे, वहीं अब उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यह बदलाव खालिस्तानी संगठनों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
भारत-यूरपीय संघ शिखर सम्मेलन का महत्व
गणतंत्र दिवस के अगले दिन होने वाला 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत इस सम्मेलन का प्रमुख विषय होगा। इसके अलावा रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने जैसे विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श होगा।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की संभावना
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल ही में कहा था कि भारत-यूरोपीय संघ का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लगभग अंतिम चरण में है। उन्होंने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” तक कहा है। इस समझौते के लागू होने से 2 अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा और यह वैश्विक GDP का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा होगा। यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में से एक होगा।
खालिस्तानी संगठनों के लिए बड़ा झटका
सूत्रों के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन खालिस्तानी समूहों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। क्योंकि यूरोप अब अलगाववादी विचारों को जगह देने के बजाय भारत के साथ रणनीतिक तालमेल को प्राथमिकता दे रहा है। यह बदलाव इन संगठनों की गतिविधियों पर बड़ा असर डालेगा। जो यूरोपीय देश पहले इन संगठनों को नजरअंदाज करते थे, वे अब इनकी हरकतों पर सख्ती से निगरानी कर रहे हैं।
क्रोएशिया में भारतीय दूतावास पर हमला
गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले क्रोएशिया की राजधानी जाग्रेब में भारतीय दूतावास पर तोड़फोड़ की घटना सामने आई। यह घटना खालिस्तानी संगठनों की बढ़ती बेचैनी को दिखाती है। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस मामले की गहन जांच की और कुछ महत्वपूर्ण सबूत हासिल किए। इन सबूतों से पता चला कि विदेशी फंडिंग के जरिए पंजाब में आतंकी मॉड्यूल्स को समर्थन दिया जा रहा था।
विदेशी फंडिंग का खुलासा
भारतीय जांच एजेंसियों ने पाया कि चैरिटी नेटवर्क, हवाला और डिजिटल ट्रांसफर के जरिए पैसा भेजा जा रहा था। यह पैसा पंजाब में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। भारत ने इन सबूतों को विदेशी सरकारों के साथ साझा किया है और उन्होंने इस जानकारी को गंभीरता से लिया है। यूरोपीय देश अब इन फंडिंग नेटवर्क पर नजर रख रहे हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2025 में कई बड़े मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। इन मामलों में विदेशों में बैठे खालिस्तानी नेटवर्क और पाकिस्तान से जुड़े तार सामने आए हैं। एनआईए की जांच में पता चला है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इन संगठनों को सहयोग दे रही है। यह सहयोग न केवल वित्तीय है बल्कि तकनीकी और रणनीतिक भी है।
पाकिस्तान की भूमिका
ISI लंबे समय से खालिस्तानी संगठनों को समर्थन देती रही है। भारत में अशांति फैलाना और अलगाववाद को बढ़ावा देना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति रही है। लेकिन अब जब यूरोपीय देश भारत के साथ मजबूती से खड़े हैं, तो पाकिस्तान की यह रणनीति कमजोर पड़ती दिख रही है। यूरोपीय संघ के नेताओं की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन कर रहा है।
भारत की कूटनीतिक सफलता
गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ की भागीदारी भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रमाण है। भारत ने लगातार प्रयासों से यूरोपीय देशों को खालिस्तानी संगठनों की असलियत से अवगत कराया है। अब यूरोपीय देश न केवल भारत की बात सुन रहे हैं बल्कि इन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रहे हैं। यह भारत की विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि है।
आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
भारत और यूरोपीय संघ के बीच आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख बनता जा रहा है। दोनों पक्ष मानते हैं कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है और इससे मिलकर लड़ना होगा। खालिस्तानी संगठनों को अब यूरोप में वह सहयोग नहीं मिल रहा जो पहले मिलता था। यह बदलाव इन संगठनों की कमर तोड़ने वाला साबित हो सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते सहयोग से आने वाले समय में और भी मजबूत रिश्ते बनने की संभावना है। व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ेगा। यह सहयोग न केवल दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता में भी योगदान देगा। खालिस्तानी संगठनों और उनके समर्थकों के लिए यह संदेश साफ है कि अलगाववाद और आतंकवाद को अब कोई जगह नहीं मिलेगी।
यूरोपीय संघ के नेताओं की गणतंत्र दिवस पर मौजूदगी सिर्फ एक कूटनीतिक कदम नहीं है। यह भारत और यूरोप की बढ़ती नजदीकी का प्रतीक है और अलगाववादी ताकतों के लिए एक सख्त संदेश है। यही वजह है कि यह कदम खालिस्तानी संगठनों और ISI को असहज कर रहा है। भारत का यह राजनयिक कदम देश की संप्रभुता और एकता की रक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

