Rashtra Bharat Logo

उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर के जमानत पर भड़का आक्रोश, हाईकोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन

उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर के जमानत पर भड़का आक्रोश, हाईकोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन
हाईकोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन (Pic Credit- @awais__usmani)

उन्नाव रेप केस में दोषी कुलदीप सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद पीड़िता के परिवार और महिला संगठनों में आक्रोश है। विरोध प्रदर्शनों के बीच न्याय व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल फिर उठ खड़े हुए हैं।

Updated:
·by
Dipali Kumari
Dipali Kumari
Share:

विषयसूची

Unnao Rape Case: उन्नाव रेप केस एक बार फिर देश की सामूहिक चेतना को झकझोर रहा है। जिस मामले को भारत में महिला सुरक्षा और राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ लड़ाई की प्रतीक माना गया, उसी केस में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है।

दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर शुक्रवार को जो दृश्य दिखा, वह बताता है कि यह मामला आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। रेप पीड़िता की मां, महिला अधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों के लोग एक ही मांग के साथ जुटे थे—सेंगर की जमानत रद्द हो और पीड़िता को पूरा न्याय मिले।

हाईकोर्ट के बाहर उबाल, पुलिस की चेतावनी

जैसे ही प्रदर्शनकारी दिल्ली हाईकोर्ट परिसर के बाहर पहुंचे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहां प्रदर्शन न करने की चेतावनी दी। पुलिस ने साफ शब्दों में कहा कि हाईकोर्ट परिसर में विरोध गैर-कानूनी है और यदि प्रदर्शन जारी रहा तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर जाने की सलाह दी गई।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कोई राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि न्याय की गुहार है। उनका सवाल सीधा था—अगर न्याय की मांग भी अदालत के दरवाजे पर नहीं की जा सकती, तो फिर आम नागरिक कहां जाए?

पीड़िता की मां का टूटा भरोसा

सबसे भावुक और तीखा बयान पीड़िता की मां का था। उन्होंने कहा कि उन्हें अब हाईकोर्ट के फैसले पर भरोसा नहीं रहा। उनका कहना था कि कुलदीप सेंगर की जमानत किसी भी कीमत पर रद्द होनी चाहिए और इसके लिए वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वहां भी न्याय नहीं मिला, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखेंगी। उनके शब्दों में दर्द और गुस्सा दोनों था। उन्होंने अपने पति की कस्टडी में मौत का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

महिला संगठनों की दो टूक चेतावनी

महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना ने साफ कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग करने आई हैं। उनका कहना था कि अदालतों का सम्मान करते हुए भी सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है।

योगिता भयाना ने कहा कि अगर पीड़िता के साथ हुआ अन्याय ऐसे ही दबा दिया गया, तो यह सिर्फ एक परिवार की हार नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की हार होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज

कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को महिलाओं के आत्मविश्वास पर बड़ा आघात बताया। उन्होंने कहा कि तकनीकी आधार पर एक दोषी को राहत देना बेहद खतरनाक मिसाल है।

उनका कहना था कि इस फैसले से देश की लाखों महिलाओं को यह संदेश जाता है कि ताकतवर लोगों के लिए कानून अलग और आम लोगों के लिए अलग हो सकता है। यह सोच लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।

सशर्त राहत, लेकिन सवाल कायम

दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दी है। सीबीआई कोर्ट पहले ही उन्हें नाबालिग से रेप के मामले में दोषी ठहरा चुकी थी और वे उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

हाईकोर्ट ने 15 लाख रुपये के बेल बॉन्ड पर उन्हें यह राहत दी है। साथ ही कई सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं, जिनमें पीड़िता के दिल्ली स्थित निवास से पांच किलोमीटर के दायरे में न जाने और पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी तरह का संपर्क न करने का निर्देश शामिल है।

जेल से बाहर नहीं आएंगे सेंगर

यह भी महत्वपूर्ण है कि इस जमानत के बावजूद कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे। पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत के मामले में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है। उस केस में उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई थी और वह मामला अभी अदालत में लंबित है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Dipali Kumari

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।