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14 मई को बिहार में बजेगा सायरन, सभी को बंद करनी होगी लाइट और दुकान, 15 मिनट के लिए होगा ब्लैक आउट; जानिए क्यों

14 मई को बिहार में बजेगा सायरन, सभी को बंद करनी होगी लाइट और दुकान, 15 मिनट के लिए होगा ब्लैक आउट; जानिए क्यों
आज शाम 7 बजे बिहार के कई जिलों में छाएगा अंधेरा, गूंजेगी सायरन की आवाज

14 मई को पटना समेत बिहार के कई जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित होगी। शाम 7 बजे सायरन बजने के बाद 15 मिनट तक ब्लैक आउट रखा जाएगा। लोगों से घरों और दुकानों की लाइट बंद रखने की अपील की गई है। प्रशासन ने इसे सिर्फ सुरक्षा अभ्यास बताया है।

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Dipali Kumari
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Mock Drill in Bihar: 14 मई यानि गुरुवार की शाम बिहार के कई जिलों में लोगों को कुछ अलग माहौल देखने को मिलेगा। राजधानी पटना समेत बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में शाम होते ही सायरन बजेंगे और लोगों से कुछ समय के लिए घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की लाइट बंद रखने की अपील की जाएगी। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह किसी खतरे की चेतावनी नहीं बल्कि एक सुरक्षा अभ्यास यानी सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल है।

पटना जिला प्रशासन के अनुसार यह विशेष अभ्यास 14 मई को शाम 7 बजे से 7 बजकर 15 मिनट तक चलेगा। इस दौरान पूरे इलाके में ब्लैक आउट जैसी स्थिति बनाई जाएगी ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि किसी आपात स्थिति में कैसे सतर्क रहना है और खुद को सुरक्षित रखना है।

क्यों किया जा रहा है मॉक ड्रिल?

दरअसल, इस मॉक ड्रिल का मकसद लोगों को हवाई हमले, बड़ी आपदा या किसी इमरजेंसी जैसी स्थिति के दौरान जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करना है। सायरन बजते ही लोगों को अपनी लाइट बंद करनी होगी और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा। इससे यह जांचने में भी मदद मिलेगी कि आपदा की स्थिति में प्रशासन और आम लोग कितनी तेजी और समझदारी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

जरूरी सेवाएं सामान्य रूप से चलेगी

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तय समय पर सहयोग करें और इसे केवल एक अभ्यास के रूप में लें। अधिकारियों का कहना है कि कुछ देर के लिए इलाके में अंधेरा जरूर रहेगा, लेकिन जरूरी सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से चलती रहेंगी। अस्पताल, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य इमरजेंसी सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

अफवाहों से बचने की अपील

पटना के डीएमत्यागराजन एस.एम. ने लोगों से अफवाहों से बचने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर किसी तरह की गलत जानकारी फैलाने से बचें और बिना घबराए प्रशासन का सहयोग करें।

मॉक ड्रिल के दौरान जिला प्रशासन का कंट्रोल रूम भी पूरी तरह सक्रिय रहेगा। किसी भी जानकारी या मदद के लिए 0612-2210118 हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के अभ्यास लोगों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी होते हैं, ताकि किसी भी मुश्किल परिस्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।