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NEET UG 2026 Paper Leak: होटल में लिखे गए नीट के सवाल, एनसीईआरटी पर लगाए निशान

NEET UG 2026 Paper Leak: होटल में लिखे गए नीट के सवाल, एनसीईआरटी पर लगाए निशान
NEET UG 2026 Paper Leak: होटल में लिखे गए नीट के सवाल, एनसीईआरटी पर लगाए निशान ( Image - AI )

CBI Chargesheet : NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI चार्जशीट ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। होटल में हाथ से सवाल लिखने से लेकर NCERT के अध्यायों पर निशान लगाने और कोचिंग नेटवर्क तक-जांच में सामने आए दावे आंखें खोलने वाले हैं। हालांकि, सभी आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और साबित होना बाकी है।

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Priyanka C. Mishra
Priyanka C. Mishra
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पेपर लीक ने तोड़ा देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा! सीबीआई चार्जशीट में हुआ बड़ा खुलासा

NEET UG 2026 Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी चार्जशीट में कई ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 94 पन्नों की चार्जशीट में जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि प्रश्नपत्र लीक करने का तरीका बेहद साधारण लेकिन सुनियोजित था। आरोप है कि परीक्षा तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ विषय विशेषज्ञ सवालों को याद कर लेते थे, उन्हें बाद में कागज की पर्चियों पर लिखते थे और संबंधित एनसीईआरटी अध्यायों पर निशान लगाकर बिचौलियों तथा कोचिंग नेटवर्क के माध्यम से चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाते थे। हालांकि ये सभी आरोप फिलहाल अदालत में विचाराधीन हैं और अभी साबित होने बाकी हैं।

13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट

सीबीआई ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। इनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग, बिचौलिए और कथित रूप से लाभ पाने वाले कुछ अभ्यर्थी शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार सभी आरोपी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

3 एनटीए विशेषज्ञों पर गंभीर आरोप

चार्जशीट के अनुसार, जिन तीन विषय विशेषज्ञों को आरोपी बनाया गया है, उनमें पी. वी. कुलकर्णी (केमिस्ट्री), मनीषा गुरुनाथ मंधारे (बायोलॉजी/बॉटनी) और मनीषा संजय हवलदार (फिजिक्स) शामिल हैं। सीबीआई का आरोप है कि प्रश्नपत्र के मॉडरेशन और अनुवाद की प्रक्रिया के दौरान इन विशेषज्ञों को अलग-अलग विषयों के प्रश्नों तक आधिकारिक पहुंच प्राप्त थी। इसी पहुंच का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए उन्होंने प्रश्नों को याद किया और बाद में होटल के कमरों में उन्हें हाथ से लिख लिया। जांच एजेंसी के मुताबिक, केवल प्रश्न ही नहीं बल्कि उनसे जुड़े एनसीईआरटी के अध्यायों और पैराग्राफ पर भी निशान लगाए गए ताकि छात्रों को संभावित प्रश्नों की सटीक तैयारी कराई जा सके। बाद में इन्हें भरोसेमंद बिचौलियों और कोचिंग संस्थानों के माध्यम से उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया। एजेंसी का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से दूर रखी गई ताकि इलेक्ट्रॉनिक सबूत न छोड़े जाएं।

हाथ से लिखे नोट्स बने अहम सबूत

सीबीआई की जांच में कई ऐसे हस्तलिखित नोट्स बरामद हुए हैं, जिनमें कथित रूप से लीक हुए प्रश्न दर्ज थे। जांच एजेंसी का कहना है कि कोचिंग संस्थानों में छात्रों से भी इन प्रश्नों को हाथ से लिखवाया जाता था ताकि किसी डिजिटल डिवाइस या ऑनलाइन चैट का रिकॉर्ड न बने। चार्जशीट में इसे साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसके अलावा डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय और अकादमिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई है, जो कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नों और आरोपियों के बीच संबंध स्थापित करती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियां

जांच के दौरान सीबीआई ने एनटीए की गोपनीय परीक्षा प्रणाली में भी कई कमियां उजागर की हैं। चार्जशीट के अनुसार, गोपनीय सेक्शन में काम करने वाले विषय विशेषज्ञों की तलाशी लेने या उनकी नियमित जांच का कोई प्रभावी प्रावधान नहीं था। ऐसे में कोई भी विशेषज्ञ प्रश्नों को याद करके बाहर जा सकता था और बाद में उन्हें लिख सकता था। चार्जशीट में उदाहरण देते हुए कहा गया है कि आरोपी पी. वी. कुलकर्णी ने 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच केवल तीन दिनों में लगभग 135 प्रश्नों का बैक-ट्रांसलेशन किया था। जांच एजेंसी का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों तक पहुंच ने कथित लीक की संभावना को बढ़ाया।

पैसों और कोचिंग नेटवर्क का खेल

सीबीआई का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाना और कुछ निजी कोचिंग संस्थानों का चयन प्रतिशत बढ़ाना था। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर प्रश्नों को चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाने के बदले भारी रकम ली जाती थी। एजेंसी का कहना है कि पूरे नेटवर्क में विषय विशेषज्ञ, बिचौलिए, कोचिंग संचालक और कुछ अभ्यर्थी अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे।

20 हजार पन्नों के दस्तावेज और 360 गवाह

सीबीआई ने इस मामले में व्यापक जांच का दावा किया है। एजेंसी ने अदालत में चार्जशीट के साथ लगभग 20 हजार पन्नों के दस्तावेज, 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज, 43 भौतिक साक्ष्य, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट और हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय भी दाखिल की है। एजेंसी का कहना है कि इन सबूतों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का क्रमवार विवरण तैयार किया गया है।

5 राज्यों में छापेमारी

मामले में सीबीआई ने 12 मई 2026 को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 72 अधिकारियों और 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम गठित की गई। जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत पांच राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल डिवाइस, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। आरोपियों के बैंक खाते, लॉकर और डीमैट खाते भी फ्रीज किए गए। पहली गिरफ्तारी 13 मई को हुई थी।

देशभर में हुआ था विरोध, परीक्षा भी हुई रद्द

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद देशभर में छात्रों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। विवाद बढ़ने पर परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए और व्यापक शिक्षा सुधार की मांग तेज हो गई। बाद में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दे दिया। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है। सीबीआई का कहना है कि उसके पास आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य हैं, जबकि सभी आरोपियों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने और अदालत में अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है। अब इस बहुचर्चित मामले पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


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प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है। अनुभव : हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन, फीचर स्टोरी, विश्लेषणात्मक लेख और यूट्यूब स्क्रिप्टिंग में मजबूत पहचान बनाई है। विभिन्न समसामयिक और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी कंटेंट विशेषज्ञ के रूप में स्थापित करती है। वर्तमान फोकस : वे समाचार, सोशल ट्रेंड्स, एंटरटेनमेंट, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर डिजिटल ऑडियंस के लिए जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी प्राथमिकता तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष प्रस्तुति और पाठकों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • समाचार लेखन और विश्लेषण : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विषयों पर स्पष्ट और संतुलित रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण। • बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट : फिल्म, सेलिब्रिटी और मनोरंजन जगत से जुड़े ट्रेंड्स और अपडेट्स पर लेखन। • ज्योतिष और लाइफस्टाइल : ज्योतिष, स्वास्थ्य, रिलेशनशिप और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों पर सरल एवं उपयोगी कंटेंट निर्माण। • यूट्यूब स्क्रिप्टिंग और डिजिटल कंटेंट : डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक, ऑडियंस-केंद्रित और रिसर्च आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने में विशेषज्ञता। • हिंदी कंटेंट निर्माण : सरल, प्रभावी और SEO-फ्रेंडली हिंदी कंटेंट तैयार करने का अनुभव। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील लेखन शैली के कारण प्रियंका सी. मिश्रा ने पाठकों के बीच एक विश्वसनीय हिंदी कंटेंट राइटर और डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल के रूप में अपनी पहचान बनाई है। समाचार और डिजिटल मीडिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा विविध विषयों पर निरंतर लेखन अनुभव उनकी विशेषज्ञता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है।