रांची: उर्सुलाइन कॉलेज में नोज रिंग को लेकर हाई-वोल्टेज ड्रामा, ABVP ने किया कॉलेज में प्रदर्शन और पुतला दहन

रांची के उर्सुलाइन इंटर कॉलेज में नोज रिंग पहनने को लेकर विवाद बढ़ गया। छात्रा के आरोपों के बाद एबीवीपी ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन और पुतला दहन किया। कई घंटे तक चले हंगामे के बीच पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। वहीं, कॉलेज प्रबंधन ने छात्रा के सभी आरोपों को खारिज किया।
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Ursuline Inter College Ranchi Controversy: रांची के उर्सुलाइन इंटर कॉलेज में नोज रिंग पहनने को लेकर कल सोमवार को विवाद खड़ा हो गया। कक्षा 11 की छात्रा जूही सिंह ने आरोप लगाया कि नोज रिंग नहीं हटाने पर उसे कॉलेज से बाहर कर दिया गया। इस घटना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में घुसकर प्रदर्शन किया, खूब नारेबाजी की और मुख्य गेट के सामने पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। करीब चार घंटे तक कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर मामला शांत कराने का प्रयास किया।
नोज रिंग नहीं हटाने पर छात्रा को कॉलेज से किया बाहर
छात्रा जूही सिंह का आरोप है कि 16 जून से कक्षाएं शुरू होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने उसे नोज रिंग हटाने के लिए कहा। उसने प्रबंधन को बताया कि चिकित्सकीय कारणों से वह तत्काल नोज रिंग नहीं निकाल सकती, लेकिन उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। छात्रा का कहना है कि बिना किसी लिखित नोटिस के उसे कॉलेज से बाहर कर दिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उसके धर्म और क्षेत्रीय पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
छात्रा के अभिभावकों ने भी कॉलेज प्रशासन पर संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बेटी का इलाज चल रहा था और डॉक्टर की सलाह के अनुसार कुछ समय बाद ही नोज रिंग हटाई जा सकती थी। उन्होंने प्रबंधन से कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी। साथ ही उनका यह भी दावा है कि कॉलेज की नियमावली में नोज रिंग पहनने पर स्पष्ट प्रतिबंध का कोई उल्लेख नहीं है।
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग
घटना के विरोध में एबीवीपी ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। संगठन की केंद्रीय कार्य सदस्य दिशा दित्या ने कहा कि यदि किसी छात्रा के साथ उसकी सांस्कृतिक या पारंपरिक पहचान के आधार पर भेदभाव किया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के सम्मान, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कॉलेज प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष
वहीं, उर्सुलाइन इंटर कॉलेज प्रबंधन ने छात्रा के सभी आरोपों को खारिज किया है। कॉलेज की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जूही सिंह ने 11 मई 2026 को नामांकन लिया था और 15 जून से शुरू हुए ओरिएंटेशन में शामिल हुई थीं। बाद में स्वास्थ्य कारणों से कुछ दिनों तक अनुपस्थित रहने के बाद जब वह 24 जून को अपने अभिभावकों के साथ कॉलेज पहुंचीं, तब उन्हें अनुपस्थिति और ड्रेस कोड सहित संस्थान के अनुशासन संबंधी नियमों की जानकारी दी गई। प्रबंधन का दावा है कि छात्रा की चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए समय देने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन इस मुद्दे पर अभिभावकों के साथ लंबी चर्चा हुई।
छात्रा को निष्कासित नहीं किया गया- कॉलेज प्रबंधन
कॉलेज ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रा को कभी निष्कासित नहीं किया गया। प्रबंधन के अनुसार, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हुई वार्ता के दौरान छात्रा की मां खुशी सिंह ने स्वयं नामांकन निरस्त कर फीस वापस करने का अनुरोध किया, जिसके बाद नियमानुसार उनका नामांकन रद्द कर शुल्क वापसी की प्रक्रिया शुरू की गई। कॉलेज ने धर्म या क्षेत्रीय पहचान को लेकर किसी भी प्रकार की टिप्पणी किए जाने के आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। साथ ही लोगों से अपील की है कि तथ्यों की पुष्टि किए बिना किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी साझा न करें।

