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नागपुर के पारडी में तेंदुए के हमले से घायल पीड़ितों को अब तक नहीं मिला मुआवजा, विधान परिषद में उठा मामला

नागपुर के पारडी में तेंदुए के हमले से घायल पीड़ितों को अब तक नहीं मिला मुआवजा, विधान परिषद में उठा मामला
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Nagpur Pardi leopard attack compensation: नागपुर के पारडी क्षेत्र में हुए तेंदुए के हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। इस घटना को लेकर विधायक अभिजीत वंजारी ने विधान परिषद में सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार पीड़ितों को तुरंत आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने की मांग भी की गई है।

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Asfi Shadab
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पारडी में तेंदुए के हमले के पीड़ितों को सहायता देने की मांग

Nagpur Pardi leopard attack compensation: नागपुर। शहर के पारडी इलाके में हाल ही में हुए तेंदुए के हमले में घायल पीड़ितों को अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। इस मुद्दे को विधायक अभिजीत वंजारी ने विधान परिषद में उठाया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

इस हमले में कई स्थानीय नागरिक घायल हुए हैं। घायलों के परिवार शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक और आर्थिक संकट भी झेल रहे हैं। इलाज का खर्च अधिक है और अधिकांश प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

विधायक वंजारी ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा जारी जीआर (सरकारी नियमों) के तहत वन्यजीव हमले में घायल नागरिकों को तत्काल आर्थिक सहायता देना अनिवार्य है। बावजूद इसके, पारडी के पीड़ितों को अब तक नियमानुसार मुआवजा नहीं मिला है।

विधायक अभिजीत वंजारी ने परिषद में उठाया पारडी तेंदुआ हमला मामला

उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि पीड़ितों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिलाया जाए। साथ ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

वंजारी ने कहा, “प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से ही पीड़ित परिवारों को राहत मिल सकती है।”

पारडी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर स्थानीय नागरिकों में भय का माहौल बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि सरकार विधान परिषद में उठे इस सवाल पर कितनी जल्दी कार्रवाई करती है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।