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नागपुर: आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव “कुवारा भिवसन” में ‘द्रौपदी महानाट्य’ पर आदिवासी समाज का विरोध, अप्पर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

नागपुर: आदिवासी सांस्कृतिक महोत्सव “कुवारा भिवसन” में ‘द्रौपदी महानाट्य’ पर आदिवासी समाज का विरोध, अप्पर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
(File Photo / AI)

नागपुर में आदिवासी लोककला प्रदर्शनी “कुवारा भिवसन” के तहत प्रस्तावित ‘द्रौपदी महानाट्य’ का आदिवासी संगठनों ने विरोध किया। उन्होंने इसे संस्कृति से असंबद्ध बताते हुए बदलाव की मांग की। समाज ने स्थानीय परंपराओं को मंच देने की बात कही और हिंदी कार्यक्रमों पर भी आपत्ति जताई। विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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Gangesh Kumar
Gangesh Kumar
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नागपुर: आदिवासी विकास विभाग द्वारा 18 से 20 अप्रैल 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय आदिवासी लोककला एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी “कुवारा भिवसन” में 19 अप्रैल को प्रस्तावित ‘द्रौपदी महानाट्य’ को लेकर आदिवासी समाज ने कड़ा विरोध जताया है। विभिन्न आदिवासी संगठनों ने आदिवासी विकास विभाग के अप्पर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम में बदलाव की मांग की।

आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि द्रौपदी या महाभारत का आदिवासी संस्कृति से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उनका आरोप है कि इस नाटक के माध्यम से आदिवासी आराध्य देव “कुवारा भिवसन” को महाभारत के भीमसेन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो उनकी संस्कृति के साथ सीधी छेड़छाड़ है।

समाज के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि आदिवासी परंपराएं, बोलीभाषाएं और लोकसंस्कृति अत्यंत समृद्ध और विशिष्ट हैं। इन भाषाओं में अनेक लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां उपलब्ध हैं — इन्हें मंच मिलना चाहिए, न कि असंबद्ध कथाओं को।

उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम में 18 और 20 अप्रैल को हिंदी गायकों के कार्यक्रम भी रखे गए हैं, जिस पर भी समाज ने आपत्ति जताई है।

ज्ञापन सौंपते समय अनेक सामाजिक, युवा और महिला संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

आदिवासी विकास विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


REPORTER BYLINE: रिपोर्ट: [Reporter Name], नागपुर