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राज्यपाल ने दूसरी बार ठुकराया विजय का दावा, कहा- 118 विधायकों का समर्थन लाओ

राज्यपाल ने दूसरी बार ठुकराया विजय का दावा, कहा- 118 विधायकों का समर्थन लाओ
राज्यपाल ने दूसरी बार ठुकराया विजय का दावा, कहा- 118 विधायकों का समर्थन (Pic credit- @timesnow)

Vijay: तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने की अनुमति नहीं मिली। राज्यपाल ने साफ कहा कि पहले 118 विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। कांग्रेस ने विजय की पार्टी को समर्थन दिया है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा अभी भी दूर होने से राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है।

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Dipali Kumari
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Vijay: तमिलनाडू  की राजनीति इस समय पूरी तरह सत्ता के गणित और जोड़तोड़ के इर्द-गिर्द घूम रही है। अभिनेता से नेता बने विजय आज गुरुवार को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन पहुंचे, लेकिन उन्हें एक बार फिर निराशा हाथ लगी। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने साफ कर दिया कि बिना बहुमत साबित किए सरकार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

 118 विधायकों के समर्थन की मांग

सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय से कहा कि पहले 118 विधायकों का समर्थन पत्र लेकर आएं, तभी शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। दरअसल 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है, जबकि विजय की पार्टी टीवीके को चुनाव में 108 सीटें मिली हैं। कांग्रेस का साथ मिलने से भी 113 सीटें ही हो रही है। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा अभी भी उनकी पहुंच से दूर दिखाई दे रहा है।

TVK की अहम बैठक

तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त हर पल नया मोड़ देखने को मिल रहा है। एक तरफ विजय अपने समर्थकों और सहयोगी दलों के साथ लगातार बैठकों में जुटे हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में सरकार गठन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। गुरुवार को टीवीके ने अपने नवनिर्वाचित विधायकों की एक अहम बैठक भी बुलाई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि पार्टी विधायक दल के नेता के नाम पर भी फैसला कर सकती है।

विजय के फैंस बेचैन

उधर विजय के समर्थकों में बेचैनी भी साफ दिखाई दे रही है। चुनाव में बड़ी जीत के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि विजय जल्द मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन अब सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं दिख रहा। कई समर्थक सोशल मीडिया पर भी राज्यपाल के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

अब तमिलनाडु की जनता की नजरें उन छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों पर टिकी हैं, जिनके समर्थन से राज्य की सत्ता की तस्वीर बदल सकती है। सवाल अब भी वही है  कि क्या विजय बहुमत जुटाकर सरकार बना पाएंगे, या तमिलनाडु की राजनीति आखिरी वक्त में फिर कोई बड़ा मोड़ ले लेगी।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।