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यूपी पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला, दो और गांवों के नाम बदले

यूपी पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला, दो और गांवों के नाम बदले
UP Panchayat Election: यूपी में योगी सरकार ने दो और ग्राम पंचायतों के नाम बदले, जानिए पूरी खबर (File Photo)

UP Panchayat Election: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पंचायत चुनाव से पहले हरदोई और फिरोजाबाद जिलों की दो ग्राम पंचायतों के नाम बदलने को मंजूरी दी। हाजीपुर का नाम सियारामपुर और उरमुरा किरार का नाम हरिनगर किया गया। यह फैसला स्थानीय निवासियों की मांग और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में लिया गया है।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शनिवार को सीएम योगी ने प्रदेश की दो ग्राम पंचायतों के नाम बदलने को अपनी मंजूरी दे दी। यह फैसला हरदोई और फिरोजाबाद जिले की ग्राम पंचायतों से जुड़ा है। यूपी सरकार ने आधिकारिक सोशल मीडिया एक्स पर इस जानकारी को सार्वजनिक किया।

सरकारी पोस्ट में बताया गया कि फिरोजाबाद जिले की तहसील और विकासखंड शिकोहाबाद में स्थित ग्राम पंचायत वासुदेवमई के अंतर्गत आने वाले ग्राम उरमुरा किरार का नाम अब हरिनगर कर दिया गया है। इसके अलावा हरदोई जिले के विकास खंड भरावन की ग्राम पंचायत हाजीपुर का नाम सियारामपुर किया गया है। यह निर्णय स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर लिया गया है।

नाम बदलने की प्रक्रिया और स्वीकृति

हरदोई जिले में हाजीपुर गांव का नाम बदलने का प्रस्ताव पहली बार अप्रैल 2024 में जिला पंचायत की बैठक में रखा गया था। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। यह फैसला गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

भरावन विकास खंड की हाजीपुर ग्राम पंचायत की प्रधान गुज्जोदेवी ने मुख्यमंत्री और मंडलायुक्त को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया था कि गांव में एक भी अल्पसंख्यक वर्ग का व्यक्ति नहीं रहता है। इसलिए गांव का नाम सियारामपुर किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव को जिला पंचायत सदन के समक्ष रखा गया, जिसे हर्षध्वनि से पारित किया गया। उसके बाद डीएम ने इसे आयुक्त और सचिव राजस्व विभाग के साथ मंडलायुक्त को भेजा।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग

एमएलसी अशोक अग्रवाल ने सदन को जानकारी दी कि इस गांव में 209 परिवार रहते हैं और कुल आबादी 1118 है। गांव के सभी निवासियों की इच्छा थी कि उनके गांव का नाम हाजीपुर से बदलकर सियारामपुर किया जाए। यह मांग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी थी। स्थानीय ग्रामीणों का मानना था कि नया नाम उनकी आस्था और परंपरा को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

हरदोई जिले के नाम परिवर्तन की मांग

नाम बदलने की मांग सिर्फ ग्राम पंचायतों तक सीमित नहीं है। करीब एक महीने पहले डीएम कार्यालय से हरदोई जिले का नाम बदलकर प्रहलाद नगरी करने का प्रस्ताव भी रखा गया था। डीएम कार्यालय की ओर से जारी पत्र में इस प्रस्ताव पर लोकसभा सदस्यों, विधानसभा सदस्यों और जिला पंचायत अध्यक्ष से महत्वपूर्ण सुझाव मांगे गए थे।

यह पहल प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी के आग्रह पर शुरू की गई थी। डीएम अनुनय झा ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा था कि वे अपने विचार साझा करें ताकि सामूहिक सुझावों को इकट्ठा करके राज्य सरकार को भेजा जा सके। इस तरह की पहल से जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। हाल ही में लखनऊ में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर सात भव्य प्रवेश द्वार बनाने की योजना शुरू की गई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन द्वारों के माध्यम से राजधानी में प्रवेश करते ही लोगों को प्रदेश की संस्कृति, आस्था और सभ्यतागत विरासत का अनुभव होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार देर शाम शहरी विकास एवं आवास विभाग की बैठक में इस परियोजना को लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए। सीएम ने कहा कि राजधानी में आने वाले हर व्यक्ति को पहली नजर में ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का अहसास होना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और शिल्प के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।

सात प्रवेश द्वारों की योजना

प्रस्तावित प्रवेश द्वारों को संगम द्वार, नंदी-गंगा द्वार, सूर्य द्वार, व्यास द्वार, धर्म द्वार, कृष्ण द्वार और शौर्य द्वार नाम दिए गए हैं। हर द्वार उस मार्ग से जुड़े किसी प्रमुख धार्मिक, पौराणिक या ऐतिहासिक स्थल का प्रतीक होगा। प्रयागराज मार्ग पर संगम द्वार त्रिवेणी संगम और कुंभ परंपरा से प्रेरित होगा। वाराणसी मार्ग पर नंदी-गंगा द्वार काशी विश्वनाथ की आध्यात्मिक आभा को दर्शाएगा।

अयोध्या मार्ग पर बनने वाला सूर्य द्वार भगवान राम और सूर्यवंश की परंपरा का प्रतीक होगा। सीतापुर रोड पर नैमिषारण्य मार्ग के लिए व्यास द्वार, हरदोई रोड पर हस्तिनापुर से जुड़ा धर्म द्वार, आगरा रोड पर मथुरा मार्ग के लिए कृष्ण द्वार तथा उन्नाव रोड पर झांसी मार्ग के लिए शौर्य द्वार का निर्माण प्रस्तावित है। शौर्य द्वार बुंदेलखंड की वीरता और शौर्य परंपरा को रेखांकित करेगा।

राजनीतिक और सामाजिक संदेश

पंचायत चुनाव से ठीक पहले नाम परिवर्तन के इन फैसलों को राजनीतिक विशेषज्ञ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में एक कदम मानते हैं। यह योगी सरकार की उस नीति का हिस्ा है जिसमें हिंदू धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में कई शहरों, रेलवे स्टेशनों और स्थानों के नाम बदले गए हैं।

इलाहाबाद को प्रयागराज, फैजाबाद को अयोध्या और मुगलसराय को दीनदयाल उपाध्याय नगर जैसे नाम परिवर्तन इसी नीति के उदाहरण हैं। सरकार का कहना है कि ये फैसले ऐतिहासिक सच्चाइयों को सामने लाने और भारतीय संस्कृति की असली पहचान को बहाल करने के लिए किए जा रहे हैं।

यूपी में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को फिर से स्थापित करने का प्रयास है। योगी सरकार के इन फैसलों से स्थानीय लोगों में अपनी जड़ों से जुड़ने की भावना मजबूत हो रही है। आने वाले समय में प्रदेश में और भी ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो उत्तर प्रदेश की प्राचीन गौरवशाली परंपरा को पुनर्स्थापित करेंगे।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।