TMC पर किसका होगा कब्जा? नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर ममता-रितब्रत आमने-सामने

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर पार्टी के भीतर सियासी संघर्ष तेज हो गया है। ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी गुट दोनों ही खुद को असली टीएमसी बता रहे हैं। मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
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West Bengal Politics: कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व और संगठन पर दावे को लेकर पार्टी के दो गुटों के बीच टकराव और तेज हो गया है। एक ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी ने भी खुद को असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधि बताया है। इस राजनीतिक खींचतान ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है।
ममता बनर्जी की सूची में 24 नेताओं के नाम
कल मंगलवार को ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर तृणमूल कांग्रेस की कार्य समिति के सदस्यों की सूची सौंपी। इस सूची में कुल 24 नेताओं के नाम शामिल हैं। सूची में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है।
इसी बीच, ममता बनर्जी के पत्र भेजने के कुछ ही घंटों बाद रितब्रत बनर्जी मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय पहुंचे। हालांकि, उनकी इस यात्रा का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे तृणमूल कांग्रेस पर दावे की लड़ाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
रितब्रत बनर्जी ने किया वास्तविक तृणमूल होने का दावा
रितब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनकी अगुवाई वाला गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस है। उनका कहना है कि पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया के तहत विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना जा चुका है और इसके बाद सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को नाम या चुनाव चिह्न के लिए अलग से कोई मांग करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि असली संगठन उनके साथ है।
रितब्रत गुट में 30 सदस्यीय
गौरतलब है कि 22 जून को न्यूटाउन स्थित एक होटल में रितब्रत गुट की ओर से तृणमूल नेताओं और प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस बैठक में हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं रितब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपान साहा को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। अखरूज्जमान को पार्टी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
इस सम्मेलन में 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति का भी गठन किया गया। अब दोनों गुटों के दावों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

