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कोलकाता: अंडे के डिब्बे से लगी आग में 66 वर्षीय महिला की मौत, सोते वक्त हुआ हादसा

कोलकाता: अंडे के डिब्बे से लगी आग में 66 वर्षीय महिला की मौत, सोते वक्त हुआ हादसा
Kolkata Fire Accident: कोलकाता के गार्डन रीच में सोती हुई बुजुर्ग महिला की आग में झुलसकर मौत (File Photo)

कोलकाता के गार्डन रीच इलाके में 66 वर्षीय लखी देवी की अंडे के कार्टन से लगी आग में झुलसकर मौत हो गई। महिला रात को सोने से पहले गर्मी के लिए कार्टन जलाती थी, जिससे चारपाई में आग लग गई। बेटे ने धुआं देखकर मां को अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है।

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Asfi Shadab
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Kolkata Fire Accident: कोलकाता के गार्डन रीच इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक 66 वर्षीय बुजुर्ग महिला की अपने ही कमरे में आग लगने से झुलसकर मौत हो गई। यह हादसा 21 जनवरी 2026 की रात करीब दो बजे हुआ, जब महिला अपने टाइल की छत वाले कमरे में अकेली सो रही थी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मृतका की पहचान लखी देवी के रूप में हुई है, जो सीताराम शॉ की पत्नी थीं। परिवार बी-5, प्रिंस दिलवार झा लेन, गार्डन रीच, कोलकाता-24 में रहता है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि महिला सोने से पहले हर रात अंडे के खाली डिब्बे को जलाने की आदत रखती थी। इसी कारण किसी तरह से उनकी चारपाई में आग लग गई और दुर्घटना हो गई।

घटना का पूरा विवरण

घटना की रात लखी देवी अपने कमरे में अकेली सो रही थीं। उनका बेटा बगल वाले कमरे में था। रात करीब दो बजे अचानक उसे अपनी मां के कमरे से धुआं निकलता दिखाई दिया। घबराकर उसने तुरंत दरवाजा खोला और अंदर गया तो देखा कि उनकी मां गंभीर रूप से जल चुकी हैं और बेहोश पड़ी हैं।

उनकी चारपाई में भी आग लगी हुई थी। बेटे ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की और पड़ोसियों को आवाज लगाई। मां को तत्काल एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।

पुलिस ने दर्ज किया अप्राकृतिक मृत्यु का मामला

गार्डन रीच पुलिस स्टेशन में इस घटना को अप्राकृतिक मृत्यु के रूप में दर्ज किया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही इंक्वेस्ट यानी जांच की औपचारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि महिला को सर्दी के कारण गर्मी की जरूरत थी, इसलिए वह रात को सोने से पहले अंडे का खाली कार्टन जलाती थी। संभवतः इसी से चिंगारी उड़कर उनकी चारपाई में लग गई और आग फैल गई। चूंकि वह अकेली सो रही थीं, इसलिए समय पर कोई मदद नहीं मिल पाई।

घरेलू सावधानियों की अनदेखी से बड़ी दुर्घटना

यह घटना एक बार फिर घरेलू सावधानियों के महत्व को रेखांकित करती है। विशेष रूप से ठंड के मौसम में बुजुर्ग लोग गर्मी पाने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते हैं। कोई कोयला जलाता है, तो कोई लकड़ी या कागज के टुकड़े। लेकिन इन सभी तरीकों में आग लगने का खतरा बना रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरे में आग जलाना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे न केवल आग लगने का खतरा रहता है, बल्कि धुएं से दम घुटने का भी खतरा होता है। खासकर बुजुर्गों को कभी भी अकेले कमरे में आग जलाकर नहीं छोड़ना चाहिए।

परिवार और पड़ोसियों में शोक की लहर

लखी देवी की इस दर्दनाक मौत से पूरे परिवार और पड़ोस में शोक की लहर है। पड़ोसियों का कहना है कि वह बेहद सीधी और शांत स्वभाव की महिला थीं। उनकी अचानक इस तरह की मौत से सभी स्तब्ध हैं। परिवार के सदस्य इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि लखी देवी का बेटा उनकी देखभाल करता था, लेकिन रात में दोनों अलग-अलग कमरों में सोते थे। अगर बेटे को समय पर धुआं नजर नहीं आता, तो शायद घर में आग और फैल सकती थी और अधिक नुकसान हो सकता था।

ऐसे हादसों से बचाव के उपाय

ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। सबसे पहले तो बंद कमरे में कभी भी आग नहीं जलानी चाहिए। अगर गर्मी की जरूरत हो तो सुरक्षित हीटर या रूम वार्मर का इस्तेमाल करना चाहिए।

बुजुर्ग लोगों को खासकर रात में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। परिवार के सदस्यों को समय-समय पर उनकी देखभाल करनी चाहिए। घर में स्मोक डिटेक्टर लगाना भी एक अच्छा उपाय है, जो आग या धुएं का पता लगते ही अलार्म बजा देता है।

इसके अलावा बिस्तर के पास ज्वलनशील चीजें जैसे कागज, कपड़े, प्लास्टिक आदि नहीं रखनी चाहिए। माचिस या लाइटर को भी सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए। घर में आग बुझाने के लिए पानी या रेत की व्यवस्था रखनी चाहिए।

प्रशासन को भी लेनी होगी पहल

Kolkata Fire Accident: ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल व्यक्तिगत सावधानी ही काफी नहीं है। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी आगे आना होगा। खासकर ठंड के मौसम में गरीब और बुजुर्ग लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।

सरकार को जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित हीटिंग उपकरण उपलब्ध कराने की योजना बनानी चाहिए। साथ ही अग्निशमन विभाग को समय-समय पर घरेलू सुरक्षा की ट्रेनिंग देनी चाहिए। स्कूलों और कॉलोनियों में फायर सेफ्टी के बारे में जानकारी देनी चाहिए।

इस दुखद घटना से सबक लेते हुए हर परिवार को अपने घर में सुरक्षा के उपाय करने चाहिए। खासकर बुजुर्ग सदस्यों की देखभाल में कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। थोड़ी सी सावधानी से ऐसी बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

पुलिस जांच जारी है और शव परीक्षण रिपोर्ट का इंतजार है। परिवार को इस कठिन समय में सहारे की जरूरत है। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।