Kolkata Birth Death Certificate: पोर्टल बंद 25 हजार आवेदन पेंडिंग, अब एक रजिस्ट्रार के भरोसे कोलकाता

Kolkata Birth Death Certificate: कोलकाता नगर निगम सूत्रों के अनुसार, तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से पिछले दो महीनों से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र का पोर्टल बंद पड़ा है।
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दो महीने में 25 हजार आवेदन लंबित
Kolkata Birth Death Certificate: राज्य सरकार के एक नए फैसले ने कोलकाता नगर निगम (KMC) की प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनता की परेशानियों को बढ़ा दिया है। नए नियम के तहत अब पूरे कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में केवल एक ही रजिस्ट्रार नियुक्त किया जाएगा जो राज्य सरकार का अधिकारी होगा। शहर में जारी होने वाले सभी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार केवल उसी के पास होगा। इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अकेले एक रजिस्ट्रार के लिए इतने बड़े शहर का कार्यभार संभालना संभव होगा।
25 हजार आवेदन अटके, पोर्टल बंद होने से हाहाकार
कोलकाता नगर निगम सूत्रों के अनुसार, तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से पिछले दो महीनों से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र का पोर्टल बंद पड़ा है।
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लंबित मामले: पोर्टल बंद होने से विलंबित पंजीकरण और पुराने प्रमाणपत्रों के लगभग 25,000 आवेदन लंबित पड़े हैं।
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जनता परेशान: रोजाना लोग प्रमाणपत्र पाने के लिए नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और अपनी नाराजगी जता रहे हैं।
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इमरजेंसी काम प्रभावित: अस्पतालों और श्मशान घाटों से जुड़े रोज के मामलों में प्रमाणपत्र जारी न होने से परिजनों को बीमा क्लेम, पेंशन और दाखिले जैसे जरूरी कामों में भारी दिक्कत आ रही है।
पुरानी व्यवस्था बनाम नया नियम
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कोलकाता नगर निगम के 16 बोरों में अलग-अलग रजिस्ट्रार और कई सब-रजिस्ट्रार तैनात थे।
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विभिन्न श्मशान घाटों और प्रसूति गृहों में भी सब-रजिस्ट्रारों के पास हस्ताक्षर करने का अधिकार था जिससे काम तेजी से निपट जाता था।
- लेकिन नए निर्देश के बाद सब रजिस्ट्रारों से हस्ताक्षर का अधिकार छीन लिया गया है। वहीं राज्य सरकार के निर्देश के बावजूद निगम आयुक्त द्वारा तय किए जाने वाले नए मुख्य रजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया भी अभी असमंजस में है।
पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पोर्टल खुलने पर भी यह समस्या आसानी से हल नहीं होगी। अकेले एक अधिकारी के लिए रोजाना सैकड़ों आवेदनों की जांच करना और उन पर हस्ताक्षर करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता समझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कोलकाता नगर निगम के लिए पुरानी व्यवस्था को ही बहाल रखा जाए और जनता को इस प्रशासनिक संकट से राहत मिल सके।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

